Chhattisgarh High Court rape case verdict: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 20 साल पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आरोपी की सजा ही आधा कर दिया है। राज्य के धमतरी जिले के इस ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को रेप के लिए 7 साल की सश्रम जेल की सजा सुनाई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे रेप की कोशिश में बदलते हुए सजा को साढ़े तीन साल कर दिया। कोर्ट ने कहा, प्रेनिट्रेशन साबित नहीं हुआ, इसलिए यह दुष्कर्म नहीं रेप की कोशिश है।
Chhattisgarh High Court: कोर्ट ने 16 फरवरी 2026 को सुनाया फैसला
यह पूरा मामला 21 मई 2004 का है, जब धमतरी की रहने वाली पीड़िता घर पर अकेली थी. आरोपी ने उसे दुकान जाने के बहाने ललचाया और अपने घर ले जाकर हाथ-पैर बांधे, मुंह में कपड़ा ठूंस दिया और जबरन यौन शोषण किया। पीड़िता की शिकायत पर मई 2004 में मामला दर्ज हुआ। अप्रैल 2005 में धमतरी की अतिरिक्त सत्र कोर्ट ने आरोपी को IPC की धारा 376(1) के तहत रेप का दोषी बताते हुए 7 साल छह महीने की सजा सुनाई थी, जो समवर्ती तौर से चलनी थी।
Chhattisgarh High Court Statement on rape case: क्या है पूरा मामला?
आरोपी ने हाई कोर्ट में अपील की, जिसकी सुनावाई न्यायाधीश नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल पीठ ने की। 16 फरवरी 2026 को दिए फैसले में अदालत ने कहा कि आरोपी का इरादा गलत और स्पष्ट था, लकिन मेडिकल और अन्य तथ्यों को देखते हुए यह बताया कि पूरा पेनिट्रेशन साबित नहीं हुआ, इसलिए यह पूरा मामला रेप नहीं बल्कि रेप की कोशिश है।
पीड़िता के बयान से सनसनी
पीड़िता के बयान में कुछ विरोधाभास पाए गए। जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) के दौरान उसने आंशिक पेनिट्रेशन की संभावना बताई, लेकिन पूरा पेनिट्रेशन साबित नहीं हो सका। डॉक्टर ने भी अपनी गवाही में रेप को लेकर कोई पक्की राय नहीं दी, हालांकि फॉरेंसिक रिपोर्ट में वीर्य मिला था। कोर्ट ने कहा कि रेप साबित करने के लिए पेनिट्रेशन होना जरूरी है, केवल डिस्चार्ज होना काफी नहीं है। सबूतों से हिंसक यौन हमला तो साबित होता है, लेकिन पेनिट्रेशन साबित नहीं हुआ।
कोर्ट के फैसले पर वकीलों ने क्या कहा?
सरकारी वकील मनीष कश्यप के अनुसार, कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सजा को धारा 376 से बदलकर 376 के साथ 511 (प्रयास) कर दिया। नई सजा साढ़े तीन साल की सश्रम कैद, 200 रुपये जुर्माना और धारा 342 के तहत 6 महीने की सजा है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। आरोपी पहले ही करीब 1 साल 1 महीने जेल में रह चुका है, जिसे सजा में जोड़ा जाएगा। फिलहाल वह बेल पर है और उसे दो महीने के अंदर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का आदेश दिया गया है, वरना सख्त कार्रवाई होगी।
Chhattisgarh High Court rape case verdict: रेप को लेकर हाई कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि कानून भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि सबूत और कानूनी परिभाषा के आधार पर फैसला देता है। रेप गंभीर अपराध है, लेकिन इसे साबित करने के लिए कानूनी शर्तों का पूरा होना जरूरी है। अगर पेनिट्रेशन साबित नहीं होता, तो अपराध की धारा बदल सकती है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि आरोपी को बरी नहीं किया गया है, बल्कि अपराध की प्रकृति के अनुसार धारा बदली गई है.


Download Android App
Download iOS App









