Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के इतिहास में 27 फरवरी 2026 का दिन एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बनकर सामने आया। लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों से जुड़े रहे लगभग 120 पूर्व नक्सलियों ने रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ विधानसभा पहुंचकर सदन की कार्यवाही को करीब से देखा और भारतीय संविधान तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। यह घटना केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि हिंसा से लोकतंत्र की ओर बढ़ते विश्वास का मजबूत संदेश भी थी।
Chhattisgarh News: लोकतंत्र के मंदिर में ऐतिहासिक उपस्थिति

विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे पूर्व नक्सलियों में कई ऐसे लोग भी शामिल थे, जो कभी सुरक्षा एजेंसियों की सूची में बड़े नाम रहे थे। इनमें एक करोड़ रुपये के इनामी रहे पूर्व नक्सली रूपेश और झीरम घाटी कांड से जुड़े रहे चैतू का नाम भी शामिल बताया गया। कुल 120 लोगों के इस समूह में 66 पुरुष और 54 महिलाएं थीं, जो अब मुख्यधारा में लौटकर नया जीवन शुरू कर रहे हैं।
सदन में उनकी मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि जिन लोगों ने कभी व्यवस्था के खिलाफ हथियार उठाए थे, वे अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझने और अपनाने के लिए तैयार हैं। विधानसभा की कार्यवाही को उन्होंने गंभीरता से देखा और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को करीब से जाना।
मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से मुलाकात
इस अवसर पर पूर्व नक्सलियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे राज्य में शांति और विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की समर्पण और पुनर्वास नीति का उद्देश्य केवल नक्सलियों को हथियार छोड़ने के लिए प्रेरित करना नहीं है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन, रोजगार और समाज में स्थायी पहचान दिलाना भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि लोकतंत्र को नजदीक से देखने के बाद ये लोग समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पुनर्वास नीति का दिखने लगा असर
गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस कार्यक्रम को राज्य की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक समरसता के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में केवल सुरक्षा कार्रवाई पर निर्भर नहीं है, बल्कि संवाद, विकास और विश्वास के जरिए स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार की पुनर्वास योजनाओं के तहत पूर्व नक्सलियों को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें। विधानसभा का यह दौरा उसी प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है।
हिंसा से संवाद की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह घटना इस बात का संकेत देती है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद से निपटने की रणनीति अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रही। विकास, विश्वास और संवैधानिक मूल्यों को केंद्र में रखकर किए जा रहे प्रयासों का असर जमीन पर दिखाई देने लगा है। 27 फरवरी 2026 का यह दिन इस संदेश के साथ याद किया जाएगा कि जब संवाद के रास्ते खुलते हैं और समाज भरोसा देता है, तब हथियारों की जगह लोकतंत्र ले लेता है। यही किसी भी राज्य और समाज की सबसे बड़ी सफलता मानी जाती है।


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