‘मियां मुसलमान’ टिप्पणी पर कोर्ट ने भेजा सीएम हिमंता बिस्वा को नोटिस, FIR दर्ज करने की मांग

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Delhi Court notice on Himanta Biswa Sarma : दिल्ली की एक अदालत ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा को ‘मियां मुसलमानों’ से जुड़ी कथित विवादित टिप्पणी मामले में नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर द्वारा दायर उस याचिका पर की गई, जिसमें शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग उठाई गई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोनू अग्निहोत्री ने 26 मई को पारित आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता की तरफ से पेश की गई दलीलों और गृह मंत्रालय द्वारा जारी ‘जीरो एफआईआर’ व ई-एफआईआर संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को रिकॉर्ड में शामिल किया गया…

Delhi Court notice on Himanta Biswa Sarma : दिल्ली की एक अदालत ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा को ‘मियां मुसलमानों’ से जुड़ी कथित विवादित टिप्पणी मामले में नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर द्वारा दायर उस याचिका पर की गई, जिसमें शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग उठाई गई है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोनू अग्निहोत्री ने 26 मई को पारित आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता की तरफ से पेश की गई दलीलों और गृह मंत्रालय द्वारा जारी ‘जीरो एफआईआर’ व ई-एफआईआर संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। अदालत ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 के लिए तय की है।

दी थी निचली अदालत को चुनौती

मामले की शुरुआत अप्रैल में हुई थी, जब हर्ष मंदर ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें मजिस्ट्रेट कोर्ट ने हिमंत बिस्वा शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग खारिज कर दी थी। ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इस मामले में उसके पास क्षेत्राधिकार (ज्यूरिस्डिक्शन) नहीं बनता।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री ने 27 जनवरी को असम के तिनसुकिया जिले के डिगबोई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर कहा था कि “चार से पांच लाख मियां वोटरों” को मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हटाया जाएगा। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि शर्मा ने कथित रूप से कहा था, “जब तक उन्हें परेशानी नहीं होगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे” और “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे असम में वोट न कर सकें।”

शब्द को लेकर विवाद

हर्ष मंदर की ओर से पेश वकील ने सत्र अदालत में दलील दी कि किसी भी संज्ञेय अपराध (Cognisable Offence) की जानकारी देश के किसी भी पुलिस थाने में दी जा सकती है, भले ही घटना कहीं और हुई हो। उन्होंने ‘जीरो एफआईआर’ के प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने गलत आधार पर याचिका को खारिज किया था।

‘मियां’ शब्द असम में बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लंबे समय से इस शब्द को अपमानजनक संदर्भ में देखा जाता रहा है, हालांकि हाल के वर्षों में समुदाय के कुछ लोगों ने इसे अपनी पहचान और प्रतिरोध के प्रतीक के तौर पर अपनाना शुरू किया है।

Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।