अमेरिका-ईरान सीजफायर पर ‘खुद की पीठ थपथपा’ रहा पाकिस्तान, अब कर दी नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग!

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Pakistan Credit on Iran-US Ceasefire: मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच कई शर्तों के साथ 15 दिन का सीजफायर हो गया है। इस फैसले के बाद जहां दुनिया भर में राहत की भावना देखी जा रही है, वहीं पाकिस्तान में इसे लेकर अलग ही माहौल बन गया है। वहां की मीडिया और कुछ संस्थाएं इस युद्धविराम का श्रेय पाकिस्तान को देने की कोशिश कर रही हैं और यहां तक कि नोबेल शांति पुरस्कार की मांग भी उठने लगी है। Pakistan Credit on Iran-US Ceasefire: पाकिस्तान में श्रेय लेने की होड़ सीजफायर की…

Pakistan Credit on Iran-US Ceasefire: मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच कई शर्तों के साथ 15 दिन का सीजफायर हो गया है। इस फैसले के बाद जहां दुनिया भर में राहत की भावना देखी जा रही है, वहीं पाकिस्तान में इसे लेकर अलग ही माहौल बन गया है। वहां की मीडिया और कुछ संस्थाएं इस युद्धविराम का श्रेय पाकिस्तान को देने की कोशिश कर रही हैं और यहां तक कि नोबेल शांति पुरस्कार की मांग भी उठने लगी है।

Pakistan Credit on Iran-US Ceasefire: पाकिस्तान में श्रेय लेने की होड़

सीजफायर की घोषणा के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर का नाम लिया था। इसी बात को आधार बनाकर पाकिस्तान की मीडिया ने इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करना शुरू कर दिया। वहां लगातार यह दिखाया जा रहा है कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान की कूटनीति के कारण ही युद्ध को रोका जा सका। इसी के चलते शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग उठाई जा रही है।

Retired Lieutenant Colonel Syed: रिटायर्ड अधिकारी का बड़ा दावा

Pakistan Credit on Iran-US Ceasefire
Pakistan Credit on Iran-US Ceasefire (Source: Social Media)

पाकिस्तान के एक अखबार में प्रकाशित लेख में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल सैयद अहमद नदीम कादरी ने दावा किया कि उनके देश ने एक बड़े युद्ध को टालने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर स्थिति को संभाला। उनके अनुसार, इस पहल से न केवल क्षेत्रीय शांति बनी रही बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और बाजारों को भी स्थिरता मिली। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने कूटनीतिक स्तर पर लगातार प्रयास कर सैन्य टकराव को रोकने की कोशिश की।

कारोबारी संगठनों का समर्थन

कराची के चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने भी पाकिस्तान सरकार और सेना प्रमुख की सराहना की है। इस संगठन का मानना है कि देश के नेतृत्व ने सही समय पर हस्तक्षेप कर स्थिति को बिगड़ने से बचाया। उन्होंने भी सीजफायर का श्रेय शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को दिया है।

चीन की भूमिका पर उठे सवाल

हालांकि, कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स पाकिस्तान के इन दावों से अलग तस्वीर पेश करती हैं। इन रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने जो भी भूमिका निभाई, वह अमेरिका के संकेत पर की गई थी। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान यहां केवल एक माध्यम के रूप में काम कर रहा था। दूसरी ओर, यह भी सामने आया है कि ईरान को सीजफायर के लिए राजी करने में चीन की भूमिका कहीं ज्यादा अहम रही। खुद डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि चीन ने ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में मदद की।

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स का दावा

वहीं अमेरिका के एक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने माना कि चीन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर ईरान पर दबाव बनाया, जिसके बाद वह सीजफायर के लिए तैयार हुआ। इस वजह से कई विशेषज्ञ मानते हैं कि असली कूटनीतिक सफलता चीन को मिलनी चाहिए, न कि पाकिस्तान को।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।