Singh Mansion Dhanbad bomb attack : झरिया विधानसभा सीट पर पिछले लगभग चार दशकों से मजदूर नेता सूर्यदेव सिंह के परिवार का कब्जा रहा है। यह परिवार जिस बंगले में रहता है उसे सिंह मेंशन के नाम से जाना जाता है। रविवार रात 11 बजे के आसपास इस बंगले पर बमबारी की घटना से सनसनी फैल गई। मामला रिहायशी और इलाके के कद्दावर नेता के घर पर हमले का है, जिसे गैंग्स औफ वासेपुर स्टाइल में अंजाम दिया गया।
दरअसल, झारखंड में इस समय नगर निकाय चुनाव चल रहे हैं। चुनाव की सरगर्मी के बीच यह घटना घटी है। जानकारी के अनुसार 1 फरवरी की रात बाइक सवार अज्ञात हमलावरों ने सिंह मेंशन पर 2 सुतली बम फेंके। बाइक सवारों ने चलती बाइक से ये बम फेंके, जिस में से एक बम गेट के भीतर विस्फोट हुआ और दूसरा गेट के बाहर। घटना देख कर समझा जा सकता है कि हमलावरों का मकसद इलाके का तनाव खराब करने व लोगों में दहशत फैलाने का था।
गनीमत रही कि इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ क्योंकि बाहर जो बम फेंका गया वह उस जगह पर फेंका गया जहां अक्सर आम लोगों का बैठना होता है। इस घटना से आसपास सनसनी फैल गई है।
Singh Mansion Dhanbad Bomb Attack : सिंह मेंशन में मौजूद थे संजीव और रागिनी

जिस समय यह घटना घट रही थी उस समय झरिया की विधायक रागिनी सिंह व उन के पति व पूर्व विधायक संजीव सिंह मौजूद थे। वे क्षेत्र में निकाय चुनाव को लेकर कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग में कर रहे थे। जाहिर है इस मीटिंग की जानकारी हमलावरों को पहले से ही थी।
बता दें सिंह मेंशन में झरिया की पूर्व विधायक कुंती सिंह भी निवास करती हैं। चुनाव से ठीक पहले हुई इस घटना राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ा दी है।
Dhanbad Crime News : सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पर्चा
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक अनवेरीफाइड पर्चा वायरल हुआ है जिस में बमबारी की जिम्मेदारी ली गई है और लिखा है कि ‘जिस धरती पर अमन का खून गिरा है उसे बंजर बना देंगे।’ इस पर्चे में कोयला और लोहा व्यापार से जुड़े व्यापरियों से रंगदारी की मांग की गई है। हालांकि इस वायरल पर्चे की जांच अभी नहीं हो पाई है।
जाहिर है पूरी घटना को पुलिस फिरोती के एंगल से जांचेगी।
Dhanbad News : सिंह मेंशन घराने की सियासती पकड़

बता दें सिंह मेंशन की कहानी सूर्यदेव सिंह की कहानी से जुड़ी हुई है। 1950 के दशक जब सूर्यदेव सिंह उत्तर प्रदेश के बलिया से नौकरी की तलाश में धनबाद आए तब यहां आकर वह कोयला क्षेत्र से जुड़े नेता बीपी सिन्हा के अधीन काम करने लगे। सिन्हा की हत्या के बाद सूर्यदेव सिंह का मालिक के कारोबार पर नियंत्रण हो गया और कोयला क्षेत्रों के डॉन बन गए। 1977 से इस हवेली ने धनबाद और आसपास के इलाकों की पूरी राजनीति को नियंत्रित किया।
1991 में सूर्यदेव सिंह की मृत्यु के बाद उनके भाई ने 1999 में विधानसभा चुनाव लड़ा और जीता। बाद में उनकी पत्नी कुंती देवी उसी सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक बनीं। कुंती 2005 और 2009 में दो बार निर्वाचित हुईं। सियासी विरासत को उनके बेटे संजीव सिंह ने आगे बढ़ाया। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता संजीव सिंह झरिया से विधानसभा चुनाव जीते। संजीव ने अपने चचेरे भाई और झरिया के डिप्टी मेयर नीरज को हराया। 2017 में नीरज सिंह की हत्या कर दी गई। नीरज के चचेरे भाई और तब के झरिया विधायक संजीव पर हत्या का आरोप लगा।
गौरतलब है कि झारखंड में निकाय चुनाव 23 फरवरी को होने जा रहे हैं और मतगणना 27 फरवरी को आएंगे। फिलहाल इलाके की सियासत हिंसा बाहुबल से गरमा गई है।


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