Smart Glasses Privacy Risks: आज के समय टेक्नोलॉजी ने हमारी जिंदगी को बहुत आसान बना दिया है. अब ऐसे स्मार्ट ग्लासेस आ गए हैं जिनसे बिना हाथ लगाए फोटो खींची जा सकती है, भाषा का तुरंत अनुवाद हो जाता है और वॉयस असिस्टेंट से मदद मिलती है. लेकिन यही डिवाइस अब कई लोगों के लिए परेशानी और डर का कारण बनती जा रही हैं, खासकर महिलाओं के लिए. इन चश्मों में छोटा सा कैमरा छिपा होता है, जिससे सामने वाले को पता ही नहीं चलता कि उसकी रिकॉर्डिंग हो रही है.
Smart Glasses Privacy Risks: चुपचाप बनाई जा रही हैं वीडियो
आजकल कुछ लोग इन स्मार्ट ग्लासेस का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. वे खुद को सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर या ‘पिक-अप आर्टिस्ट’ कहते हैं. ये लोग पब्लिक जगहों पर महिलाओं से बातचीत करते हैं और बिना बताए वीडियो रिकॉर्ड कर लेते हैं. बस स्टॉप, बाजार, बीच, पार्क और सड़कों पर ऐसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. बाद में ये वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दी जाती हैं, जहां उन पर आपत्तिजनक कमेंट्स भी किए जाते हैं. कई महिलाओं को तब पता चलता है जब वीडियो वायरल हो चुकी होती है.

Social Media Harassment: विदेशों में सामने आए गंभीर मामले
पिछले महीने इंग्लैंड में एक महिला ने एक व्यक्ति पर आरोप लगाया कि उसने होटल में बिताए गए निजी पलों को चोरी-छिपे रिकॉर्ड कर लिया. बाद में उस व्यक्ति ने वही वीडियो महिला को भेज दिए. महिला को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उसकी रिकॉर्डिंग की जा रही है. हालांकि कोर्ट ने आरोपी को जेल नहीं भेजा, जिससे लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली. इसी तरह अमेरिका में एक महिला को तब गहरा सदमा लगा जब उसे पता चला कि एक सुपरमार्केट में हुई बातचीत का वीडियो बिना उसकी इजाजत रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया गया था.
Smart Glasses Misuse: पब्लिक जगहों पर बढ़ता प्राइवेसी का खतरा
मोबाइल फोन से रिकॉर्डिंग करना आसानी से समझ आ जाता है क्योंकि कैमरा सामने दिखता है. लेकिन स्मार्ट ग्लासेस में कैमरा छिपा होता है, जिससे कोई अंदाजा नहीं लगा पाता कि वीडियो बन रही है. यही वजह है कि लोग अब पब्लिक जगहों पर भी सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं.

कानून अब भी पीछे हैं
अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में भी पब्लिक जगहों पर बिना अनुमति वीडियो रिकॉर्ड करना कई जगहों पर गैरकानूनी नहीं माना जाता. जब तक कोई निजी जगह या ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल न हो, तब तक कानून ज्यादा सख्त नहीं हैं. भारत में भी स्मार्ट ग्लासेस को लेकर कोई साफ नियम नहीं बने हैं. डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट में पब्लिक रिकॉर्डिंग को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है. इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति बिना बताए रिकॉर्ड कर सकता है.

आगे क्या करना जरूरी है?
आज के समय में महिलाओं को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. स्मार्ट ग्लासेस कैसे दिखते हैं और उन्हें कैसे पहचाना जाए, इसकी जानकारी होना जरूरी है. साथ ही सरकार को पब्लिक जगहों पर रिकॉर्डिंग को लेकर सख्त कानून बनाने चाहिए, ताकि बिना इजाजत वीडियो बनाने वालों पर कार्रवाई हो सके. टेक कंपनियों को भी ऐसी तकनीक विकसित करनी चाहिए जिससे रिकॉर्डिंग करते समय सामने वाले को साफ संकेत मिले.
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