US Navy escort ships Hormuz: मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को परेशानी में तो डाल ही रखा है, लेकिन दूसरी और अब वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक बड़ी स्थिति सामने आई है। अमेरिकी नौसेना ने संकेत दिया है कि फिलहाल वह इस रास्ते से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों या तेल टैंकरों को सैन्य सुरक्षा (एस्कॉर्ट) देने की स्थिति में नहीं है। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और तेल बाजार में चिंता बढ़ गई है।
US Navy escort ships Hormuz: ट्रंप के बयान से अलग दिख रही स्थिति
कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा था कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका तेल टैंकरों को सुरक्षित मार्ग देने के लिए नौसेना एस्कॉर्ट की व्यवस्था कर सकता है। उन्होंने तेल कंपनियों से यह भी कहा था कि वे बिना डर के इस रास्ते से अपने जहाजों को भेजें। लेकिन मौजूदा हालात ट्रंप के उस बयान से अलग नजर आ रहे हैं। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री Chris Wright ने एक इंटरव्यू में साफ किया कि फिलहाल खतरा इतना अधिक है कि अमेरिकी नौसेना के लिए जहाजों को सुरक्षा देना संभव नहीं है।
शिपिंग कंपनियों की बढ़ी चिंता
खाड़ी क्षेत्र में हालात तेजी से बिगड़े हैं। शिपिंग कंपनियां लगभग रोजाना अमेरिकी सेना से सुरक्षा की मांग कर रही हैं। इसके बावजूद अमेरिकी नौसेना का कहना है कि जब तक हमलों का खतरा कम नहीं होता, तब तक एस्कॉर्ट मिशन शुरू नहीं किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, नौसेना ने शिपिंग और ऊर्जा कंपनियों के साथ हुई बैठकों में स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा सुरक्षा जोखिम बहुत ज्यादा है। इसलिए फिलहाल जहाजों को सैन्य सुरक्षा देना संभव नहीं है।
दुनिया के तेल कारोबार के लिए बेहद अहम मार्ग
Strait of Hormuz वैश्विक तेल सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता माना जाता है। दुनिया में होने वाले समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अमेरिका और Israel द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई है। कई शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों को रोक दिया है, जबकि कुछ जहाज खाड़ी में लंगर डालकर हालात सुधरने का इंतजार कर रहे हैं।
ईरान की चेतावनी ने बढ़ाई टेंशन
Islamic Revolutionary Guard Corps की नौसेना के कमांडर Alireza Tangsiri ने हाल ही में अमेरिका पर तंज कसते हुए कहा था कि यदि कोई तेल टैंकर इस मार्ग से गुजरना चाहता है तो उसे पहले किसी अमेरिकी युद्धपोत को साथ लेकर आना चाहिए। उनका यह बयान अप्रत्यक्ष चेतावनी के रूप में देखा गया। ईरान पहले ही कह चुका है कि अगर हालात और बिगड़े तो वह इस समुद्री रास्ते को बंद भी कर सकता है।
तेल बाजार पर मंडराता खतरा
दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी Saudi Aramco ने चेतावनी दी है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बाधित रहा तो इसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है और कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
समुद्र में ईरान की रणनीतिक ताकत
समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इस क्षेत्र को सुरक्षित करना आसान नहीं है। ईरान के पास समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने, ड्रोन से हमला करने और तेज रफ्तार नौकाओं के जरिए अचानक हमले करने की क्षमता है। ऐसी स्थिति में किसी भी एस्कॉर्ट मिशन के दौरान जहाजों और युद्धपोतों दोनों पर बड़ा खतरा बना रहता है। यही कारण है कि अमेरिका फिलहाल सीधी सैन्य सुरक्षा देने से बच रहा है।
अमेरिका की मौजूदा रणनीति
ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के अनुसार, अमेरिका की प्राथमिकता अभी ईरान की सैन्य क्षमता और हथियार निर्माण से जुड़े ढांचों को कमजोर करना है। उनका कहना है कि यदि सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो यह कुछ हफ्तों तक चल सकती है, लेकिन लंबे समय तक युद्ध की संभावना कम है। कुल मिलाकर, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग उद्योग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।






















