Uttarakhand CM on Kedarnath Temple : इस साल बाबा केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल को खुले. इसके बाद हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन करने केदारनाथ पहुंच रहे हैं. केदारनाथ न सिर्फ आस्था का प्रमुख केंद्र है बल्कि यह देश की परम्पराओं को भी दर्शाता है. बता दें यात्रा शुरू होने से लगभग 6 महीने तक कपाट खुले रहते हैं, और श्रद्धालु इस बीच दर्शन कर सकते हैं. इस विषय पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाबा केदारनाथ की विराट विरासत व सरकार की तैयारियों को लेकर अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा, “अपनी राय रखी साथ में मंदाकिनी के तट पर स्थित करोड़ों भारतीयों की अटूट आस्था का केंद्र और हमारी सनातन संस्कृति की धड़कन बाबा केदार के पवित्र प्रांगण में उत्तराखंड के मुख्य सेवक के रूप में देश व प्रदेश की समृद्धि हेतु जब भी मैं कदम रखता हूं तो मुझे यहाँ की वायु में आदि गुरु शंकराचार्य के तप की सुगंध और पत्थरों में पांडवों की भक्ति का स्पंदन सुनाई देता है। केदारनाथ मेरे लिए राजनीति से परे आत्मा का विश्राम स्थल और कर्तव्य की वेदी है। आज का केदारनाथ एक नए और भव्य भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक बनकर पूरी दुनिया के सामने भारत की आध्यात्मिक तस्वीर और सनातन चेतना का प्रतिनिधित्व कर रहा है।”
साधा कांग्रेस पर निशाना
उन्होंने आगे कहा, “इतिहास इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस के शासनकाल में आस्था के केंद्र केदारनाथ को विकास योजनाओं से बाहर रखा गया, लेकिन उससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण और वेदनापूर्ण था वर्ष 2013 की त्रासदी के समय तत्कालीन सरकार का संवेदनहीन और दूरदृष्टिहीन रवैया, जिसे मानवता के माथे पर लगा एक ऐसा कलंक कहना अनुचित नहीं होगा, जिसने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और आपदा से प्रभावित लोगों की पीड़ा दोनों को गहराई से आहत किया।
“जब पूरी केदार घाटी अपनों को खोने के गम में डूबी थी, कोई अपने करीबियों की तलाश में भटक रहा था तो कोई अपने सपनों के आशियाने को मलबे के ढेर में समाते हुए देख पीड़ा में डूबा था, तब तत्कालीन प्रदेश सरकार दिल्ली के गलियारों में फाइलों और औपचारिकताओं में उलझी रही और जनता को राहत एवं बचाव कार्य के झूठे आश्वासन देकर गुमराह करती रही।
“जबकि तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए प्रधानमंत्री मोदी जी ने मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखते हुए राहत एवं पुनर्वास कार्य के लिए सहायता का हाथ बढ़ाया, परंतु राजनीतिक अहंकार में डूबी सरकार ने केंद्र के इशारों पर उस सहयोग को भी नकारने का संकेत दिया। स्थिति इतनी भयावह थी कि विभिन्न माध्यमों से प्राप्त ₹6,260 करोड़ के बजट में से तत्कालीन प्रशासन मात्र 59% राशि ही खर्च कर पाया।
CAG रिपोर्ट का किया जिक्र
उन्होंने कहा, “हालिया कैग की जाँच रिपोर्ट में पाया गया कि आपदा राहत हेतु प्राप्त लगभग ₹96.08 करोड़ उन सड़कों और पुलों पर खर्च किए गए, जो त्रासदी में क्षतिग्रस्त ही नहीं हुए थे, जबकि लगभग ₹294 करोड़ से अधिक की राशि उन कार्यों में बहा दी गई जो मूल योजना का हिस्सा ही नहीं थे। ऐसा प्रतीत होता है मानो आपदा पीड़ितों के आँसू भी तत्कालीन सरकार की भ्रष्ट और दिशाहीन कार्यशैली की भेंट चढ़ गए हों।
“सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण लगभग निष्क्रिय पड़ा रहा और केदारनाथ रोपवे व पुरोहित आवास जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएँ बजट स्वीकृत होने के बावजूद वर्षों तक फाइलों में दबी रहीं। उनके पास न तो पुनर्निर्माण का कोई स्पष्ट खाका था और न ही एक विशेष वर्ग की राजनीति से ऊपर उठकर करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं व आपदा से प्रभावित माताओं, बहनों, बच्चों और बुजुर्गों के इस धर्मक्षेत्र को पुनर्जीवित करने की इच्छाशक्ति ही।”
RSS की सामाजिक भूमिका
उन्होंने कहा, “उस भीषण संकट में जब कई सरकारी तंत्र विफल हो रहे थे, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता स्थानीय लोगों के लिए देवदूत बनकर सामने आए। शून्य से नीचे के तापमान में निस्वार्थ भाव से हमारे साथियों ने घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया, अपनों से बिछड़े लोगों को मिलाया और मानवता की सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। वही संस्कार आज भी हमारी कार्यशैली का आधार हैं — “नर सेवा ही नारायण सेवा है।
“इसके विपरीत हमारी सरकार ने हर संकट में “विकल्प रहित संकल्प” की भावना के साथ कार्य किया है। सिलक्यारा सुरंग रेस्क्यू अभियान से लेकर उत्तरकाशी व धराली जैसी भीषण आपदाओं तक हमने ‘टाइम-बाउंड’ और ‘ग्राउंड जीरो’ आधारित आपदा प्रबंधन का उदाहरण प्रस्तुत किया। मैं स्वयं तब तक घटनास्थल पर डटा रहा, जब तक स्थिति पूर्णतः सामान्य नहीं हुई। आज उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग हर संकट में संवेदनशीलता और तत्परता के साथ जमीन पर कार्य करता हुआ दिखाई देता है।
“हमारे लिए राजनीति नहीं, जनसेवा करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनके लिए केदारनाथ मात्र एक पर्यटन स्थल था, लेकिन हमारे लिए यह श्रद्धा, संस्कृति और राष्ट्रचेतना का सर्वोच्च शिखर है। यही कारण है कि देश की जनता आज उस राजनीति को लगातार नकार रही है, जिसने दशकों तक भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, तीर्थ और सनातन प्रतीकों को वह सम्मान और प्राथमिकता नहीं दी जिसकी वे वास्तविक रूप से पात्र थे।
“राम मंदिर आंदोलन को वर्षों तक उलझाए रखना, रामभक्तों पर गोलियाँ दागना, रामसेतु को काल्पनिक बताने संबंधी विवादित शपथपत्र, समान नागरिक संहिता और नागरिकता संशोधन अधिनियम जैसे विषयों पर तुष्टिकरण आधारित राजनीति, सनातन पर आपत्तिजनक टिप्पणियों पर लगातार मौन तथा सोमनाथ पुनर्निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियानों पर राजनीतिक प्रश्न खड़े करना — ये सब उस मानसिकता को दर्शाते हैं जिसने करोड़ों लोगों की आस्था को कभी राष्ट्रचेतना के केंद्र में स्वीकार ही नहीं किया।”
‘विरासत के साथ विकास’
उन्होंने कहा, “इसके विपरीत आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ‘विरासत के साथ विकास’ की भावना के साथ केदार-बद्रीनाथ, जागेश्वर, आदि कैलाश, मानसखंड मंदिर माला के साथ ही काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, उज्जैन में महाकाल लोक, अयोध्या और सारनाथ जैसे आध्यात्मिक केंद्रों के पुनर्जागरण को भारत की सांस्कृतिक अस्मिता और सनातन चेतना के पुनर्स्थापन का राष्ट्रीय अभियान मानकर कार्य कर रही है।
“जिसने भारत की सांस्कृतिक आत्मा के पुनर्स्थापन को राष्ट्रीय संकल्प का स्वरूप दिया है। उनके नेतृत्व में अयोध्या में प्रभु श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा ने करोड़ों श्रद्धालुओं की सदियों पुरानी प्रतीक्षा को पूर्ण किया। आज ‘सोमनाथ में भी भव्य व दिव्य अमृत महोत्सव’ हो रहा है जो ऐतिहासिक है। केदारनाथ में आधुनिक पुनर्निर्माण, बद्रीनाथ मास्टर प्लान, चारधाम ऑल वेदर रोड, आदि कैलाश यात्रा मार्ग, मानसखंड मंदिर माला मिशन और देवभूमि उत्तराखंड के प्राचीन मंदिरों का संरक्षण भारत की आध्यात्मिक धारा को पुनः जनमानस के केंद्र में स्थापित कर रहे हैं।
“मोदी जी के नेतृत्व में संसद भवन में स्थापित ‘सेंगोल’ भारतीय परंपरा, धर्माधारित नैतिक शासन और सांस्कृतिक निरंतरता का जीवंत प्रतीक बन चुका है। जिसका संदेश है कि आधुनिक भारत अपनी आत्मा से कटकर नहीं, अपनी सभ्यतागत चेतना को साथ लेकर आगे बढ़ेगा। प्रधानमंत्री मोदी जी ने साधु-संतों, अखाड़ों, शंकराचार्यों और सनातन परंपराओं को जो सम्मान दिया है, वह दशकों से उपेक्षित उस आध्यात्मिक समाज को राष्ट्रीय सम्मान दिलाने का कार्य है, जिसने सदियों तक भारत की संस्कृति की रक्षा की।
“दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में स्थान दिलाना, योग को वैश्विक सम्मान दिलाना, कुंभ और महाकुंभ जैसे आयोजनों को विश्वस्तरीय स्वरूप प्रदान करना, तीर्थ स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करना तथा डिजिटल व्यवस्थाओं के माध्यम से बहन-बेटियों व श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाना इस बात का प्रमाण है कि भारत अब अपनी विरासत को बोझ नहीं, अपनी सबसे बड़ी सभ्यतागत शक्ति के रूप में देख रहा है।”
श्रद्धालुओं की संख्या तोड़ रहा रिकोर्ड
आगे कहा, “आज रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं का केदारनाथ से अयोध्या व सोमनाथ पहुँचना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जनता अपनी जड़ों की ओर लौट रही है। यह भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास, सभ्यतागत गौरव और सनातन चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक है।
“आज देश जिस भव्य और दिव्य स्वरूप में दुनिया के सामने खड़ा है, उसके पीछे मोदी जी का अटूट संकल्प और सनातन के प्रति उनकी अगाध आस्था है। उनके नेतृत्व में हमारी सरकार ने ‘केदारनाथ मास्टर प्लान’ के प्रथम और द्वितीय चरण के अंतर्गत मंदिर परिसर का चौड़ीकरण, मंदाकिनी एवं सरस्वती नदी तटों पर सुरक्षा दीवारों का निर्माण, संगम क्षेत्र का पुनर्विकास, तीर्थ पुरोहित आवास, आधुनिक पाथवे, रेन शेल्टर, यात्री सुविधा केंद्र, डिजिटल कनेक्टिविटी, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, आपदा प्रबंधन तंत्र, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र तथा आदि गुरु शंकराचार्य जी की समाधि और उनकी भव्य प्रतिमा का पुनर्निर्माण जैसे ऐतिहासिक कार्य सम्पन्न किए हैं।”
गिनाई सरकार की योजनाएं
धामी ने बताया लगभग ₹12,000 करोड़ से अधिक लागत की चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना ने श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाया है, जबकि लगभग ₹4,081 करोड़ की सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे परियोजना और लगभग ₹2,730 करोड़ की हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना भविष्य में करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए सुगम सिद्ध होंगी।
चारधाम यात्रा में भी लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या ने स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन क्षेत्र को नई ऊर्जा प्रदान की है। ‘होमस्टे योजना’ और आध्यात्मिक पर्यटन ने हजारों स्थानीय परिवारों की आजीविका को सशक्त किया है तथा देवभूमि का प्रत्येक परिवार इस परिवर्तन का सहभागी बन रहा है। देश और दुनिया का विश्वास आज उत्तराखंड पर पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है।
आगामी 2027 महाकुंभ हेतु भी हमारी सरकार युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है। आधुनिक ट्रैफिक प्रबंधन, डिजिटल मॉनिटरिंग, घाटों का पुनर्विकास, श्रद्धालुओं हेतु विश्वस्तरीय सुविधाएँ, सुरक्षा व्यवस्था और स्वच्छता के व्यापक विजन पर तेजी से कार्य किया जा रहा है, ताकि पूरी दुनिया भारत की आध्यात्मिक शक्ति और सनातन संस्कृति के इस दिव्य स्वरूप को करीब से अनुभव कर सके।
जनता का अटूट विश्वास
उन्होंने कहा, “समस्त विकास कार्य हेतु हमारी सरकार के प्रयासों को हर कदम पर केंद्र व जनसमुदाय का अपार स्नेह और आशीर्वाद मिल रहा है। आज देश की जनता तुष्टिकरण और सनातन विरोधी विचारधारा को निरंतर नकार रही है तथा मोदी जी के नेतृत्व पर गंगा से गंगासागर, कामाख्या से पेरूमल और नालंदा से सोमनाथ तक अपना अटूट विश्वास व्यक्त कर रही है।
“इसी कड़ी में आज भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में सोमनाथ मंदिर अपनी प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूर्ण होने का गवाह बन रहा है। आज ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ उस सनातन चेतना, आध्यात्मिक शक्ति और सांस्कृतिक अमरत्व का प्रतीक बन रहा है जिसने हजारों वर्षों से भारत की आध्यात्मिक आत्मा को प्रकाशित किया है।
“मोदी जी के कुशल मार्गदर्शन में, मैं देवभूमि के मूल स्वरूप, इसकी आध्यात्मिक पहचान, हमारी प्राचीन परंपराओं और करोड़ों सनातन भाई-बहनों की श्रद्धा के प्रतीक इस पावन धाम की आत्मा को किसी भी कीमत पर विकृत या कमजोर नहीं होने दूँगा। मेरे लिए सत्ता और राजनीति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण यह प्रदेश, इसकी विरासत, इसकी समृद्धि और जनभावनाएँ हैं।
जनता के साथ रहने का लिया संकल्प
“उत्तराखंड के विकास, सांस्कृतिक उत्थान और जनकल्याण हेतु मुझे जो भी जिम्मेदारी मिलेगी, मैं उसके लिए सदैव तत्पर रहूँगा।
“हमारा प्रदेश भारत की ऋषि परंपरा और सनातन चेतना का सदियों से जीवंत केंद्र रहा है। हमारी सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के माध्यम से ‘विकास और विरासत’ के मध्य संतुलन बनाए रखते हुए उत्तराखंड को ऐसा आदर्श राज्य बनाने हेतु संकल्पित है, जहाँ के युवाओं में आधुनिकता भी हो और अपनी सभ्यतागत जड़ों से अटूट जुड़ाव भी। अतः देवभूमि की अस्मिता और सनातन गौरव की रक्षा के लिए मेरा प्रत्येक क्षण समर्पित रहेगा।”


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