What is International Energy Agency: इजराइल-ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के चलते वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इसी बीच इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए लगभग 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में जारी करने का फैसला किया है। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि दुनिया में तेल की सप्लाई बनी रहे और कीमतें अचानक न बढ़ें। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर IEA क्या है और यह कैसे काम करती है।
What is International Energy Agency: IEA क्या है?
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसका मुख्यालय फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित है। इसकी स्थापना 1974 में की गई थी। दरअसल, 1973 के अरब तेल संकट के बाद दुनिया के कई देशों को ऊर्जा की भारी कमी का सामना करना पड़ा। उस समय तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC ने तेल की आपूर्ति कम कर दी थी, जिससे कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं।
इस संकट से निपटने और भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए IEA का गठन किया गया। शुरुआत में इसका फोकस सिर्फ तेल की आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा पर था, लेकिन अब यह संगठन ऊर्जा के लगभग हर क्षेत्र में काम करता है।
IEA के मुख्य काम
IEA का उद्देश्य दुनिया में ऊर्जा से जुड़े जोखिमों को कम करना और देशों को बेहतर ऊर्जा नीति बनाने में मदद करना है। इसके प्रमुख काम इस प्रकार हैं:
- वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना।
- तेल की आपूर्ति में बाधा आने पर देशों के बीच समन्वय करना।
- सरकारों को ऊर्जा नीति से जुड़ी सलाह देना।
- स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देना।
- ऊर्जा से जुड़े डेटा, रिपोर्ट और भविष्य के अनुमान जारी करना।
IEA की रिपोर्टें और विश्लेषण दुनिया भर की सरकारों, कंपनियों और विशेषज्ञों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
कितने देश इसके सदस्य हैं? क्या भारत इसमें शामिल है?
मौजूदा समय में IEA के 32 सदस्य देश हैं। इनमें अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा जैसे प्रमुख विकसित देश शामिल हैं। भारत अभी इसका पूर्ण सदस्य नहीं है, लेकिन वह सहयोगी देश (Associate Member) के रूप में इससे जुड़ा हुआ है और इसके कई कार्यक्रमों में भाग लेता है। IEA का दावा है कि उसके सदस्य देश मिलकर दुनिया की लगभग 80 प्रतिशत ऊर्जा खपत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
IEA तेल का भंडार कैसे रखती है?
IEA के पास खुद कोई केंद्रीय तेल भंडार नहीं होता। इसके बजाय, इसके सदस्य देशों को अपने-अपने यहां रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) बनाए रखने होते हैं। नियम के मुताबिक हर सदस्य देश को कम से कम 90 दिनों के शुद्ध तेल आयात के बराबर भंडार रखना जरूरी होता है।
यह भंडार तीन तरीकों से रखा जा सकता है:
- सरकारी भंडार – जैसे अमेरिका का स्ट्रेटजिक पेट्रोलियम रिजर्व
- एजेंसी या निजी भंडार
- इंडस्ट्री स्टॉक – जहां कंपनियों को न्यूनतम तेल स्टॉक रखने का आदेश होता है
कुल मिलाकर सदस्य देशों के पास लगभग 1.2 अरब बैरल से ज्यादा आपातकालीन सार्वजनिक तेल भंडार और लगभग 600 मिलियन बैरल अतिरिक्त इंडस्ट्री स्टॉक मौजूद रहता है।
तेल कब और कैसे रिलीज किया जाता है?
जब दुनिया में तेल की आपूर्ति अचानक प्रभावित होती है, जैसे युद्ध, प्रतिबंध या प्राकृतिक आपदा के कारण—तब IEA के सदस्य देश मिलकर तेल रिलीज करने का फैसला लेते हैं। IEA के गवर्निंग बोर्ड की बैठक में यह तय किया जाता है कि बाजार में कितना तेल जारी किया जाएगा।
इसके बाद हर सदस्य देश अपने भंडार से तेल निकालकर बाजार में उपलब्ध कराता है। इससे बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ती है, कीमतों में तेजी रुकती है और संकट को कुछ समय के लिए नियंत्रित किया जा सकता है।
IEA और किन क्षेत्रों में काम करती है?
आज IEA सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है। यह ऊर्जा के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करती है, जैसे:
- ऊर्जा डेटा और विश्लेषण: संगठन दुनिया भर की ऊर्जा खपत और उत्पादन पर विस्तृत रिपोर्ट जारी करता है।
- क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन: जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और नेट-जीरो उत्सर्जन को बढ़ावा देता है।
- ऊर्जा दक्षता: कम ऊर्जा में अधिक उत्पादन करने वाली तकनीकों को अपनाने की सलाह देता है।
- तकनीकी परामर्श: देशों को बिजली ग्रिड, नई ऊर्जा तकनीकों और ऊर्जा सुरक्षा पर मार्गदर्शन देता है।
पहले कब-कब तेल रिलीज किया गया?
IEA ने कई बार वैश्विक संकट के दौरान तेल भंडार जारी किए हैं।
- मार्च 2026 – ईरान युद्ध के कारण लगभग 400 मिलियन बैरल तेल रिलीज करने का फैसला
- 2022 – रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद लगभग 182–200 मिलियन बैरल तेल जारी किया गया
- 1991 – गल्फ वॉर के दौरान
- 2005 – हरिकेन कैटरीना के बाद
- 2011 – लीबिया संकट के समय
इन कदमों का उद्देश्य हमेशा वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखना रहा है।
यह भी पढ़ें: इजरायली हमले में आईआरजीसी कमांडर इस्माइल देहगान की मौत, ईरान के लिए बड़ी क्षति























