हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव जी को समर्पित होता है। इस महीने में लोग पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं। कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो इस समय भारत के अलग-अलग शिव मंदिरों के दर्शन करने के लिए जाते हैं। माना जाता है कि भगवान शिव की पूजा करने से सभी दुख और पाप खत्म हो जाते हैं। वैसे तो शिवजी के दर्शन हर दिन फलदायी माने जाते हैं, लेकिन सावन के महीने में 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में चलिए जानते हैं, सावन में आप कहां-कहां दर्शन कर सकते हैं।
सावन में ज्योतिर्लिंग दर्शन का महत्व

- माना जाता है कि सावन के महीने में भगवान शिव माता पार्वती के साथ पृथ्वी पर निवास करते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
- सावन के समय ज्योतिर्लिंग के दर्शन या उनका नाम जपने से इंसान के जीवनभर के पाप धुल जाते हैं।
- इन पवित्र स्थानों पर दर्शन करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में अच्छी ऊर्जा आती है।
ये हैं भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग

- सोमनाथ गुजरात – सौराष्ट्र में स्थित यह भारत का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है।
- मल्लिकार्जुन आंध्र प्रदेश – श्रीशैलम पर्वत पर स्थित इसे ‘दक्षिण का कैलाश’ भी कहते हैं।
- महाकालेश्वर मध्य प्रदेश – उज्जैन में स्थित यह एकमात्र दक्षिण-मुखी ज्योतिर्लिंग है, जहां भस्म आरती प्रसिद्ध है।
- ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश – नर्मदा नदी के मांधाता द्वीप पर स्थित, जहां ॐ कार की आकृति बनती है।
- केदारनाथ उत्तराखंड – हिमालय की गोद में स्थित, चार धाम यात्रा और केदारनाथ धाम का प्रमुख हिस्सा।
- भीमाशंकर महाराष्ट्र – पुणे के पास सह्याद्री पर्वत पर स्थित, जहां से भीमा नदी का उद्गम होता है।
- काशी विश्वनाथ उत्तर प्रदेश – वाराणसी (काशी) की पवित्र नगरी में गंगा के तट पर स्थित।
- त्र्यंबकेश्वर महाराष्ट्र – नासिक में गोदावरी नदी के तट पर स्थित है।
- वैद्यनाथ झारखंड – देवघर में स्थित इस ज्योतिर्लिंग को ‘बैद्यनाथ धाम’ भी कहा जाता है।
- नागेश्वर गुजरात – द्वारका के समीप स्थित, इसे नागों के देवता का मंदिर भी माना जाता है।
- रामेश्वरम तमिलनाडु – राम सेतु के पास स्थित, यह दक्षिण भारत का अत्यंत पवित्र धाम है।
- घृष्णेश्वर महाराष्ट्र – एलोरा की गुफाओं के पास स्थित, इसे शिवजी का अंतिम ज्योतिर्लिंग माना जाता है।


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