देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने कोरोना वायरस (कोविड-19) की महामारी से निपटने में जुटे डॉक्टरों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा उपलबध कराने का बुधवार को केंद, सरकार, सभी राज्य सरकारों, केंद, शासित प्रदेशों की पुलिस को निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस रवीन्द, भट की पीठ ने नागपुर के चिकित्सक जेरिल बनैत की वादकालीन याचिका स्वीकार करते हुए दिशा-निर्देश जारी किये। कोर्ट ने इस माह के पहले सप्ताह में इंदौर एवं अन्य की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मानवता की रक्षा में जुटे चिकित्सक एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला किया जाना निंदनीय है और वह केंद्र, राज्य सरकारों एवं केंद शासित प्रदेशों के पुलिस अधिकारियों को निर्देश देता है कि कोविड-19 संक्रमित पीड़ित या आइसोलेशन वार्ड में रखे गये संभावितों का इलाज करने वाले चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाये।
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खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार कोविड-19 पर काबू पाने में जुटे चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों एवं अन्य सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा पहुंचाने वाले या हमला करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। कोर्ट ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुरूप सुरक्षा संबंधी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया।
इन उपकरणों में हजार्डस मटेरियल सूट, पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्वीपमेंट (पीपीई), स्टेराइल मेडिकल/नाइट्राइल ग्लोव्स, स्टार्च एपेरल, मेडिकल मास्क, गोगल्स, फेसशिल्ड, रेसपाइरेटर्स, शू कवर्स, हेड कवर्स एवं कॉवर ऑल/गाउन्स शामिल हैं। न्यायालय ने घरेलू स्तर पर ऐसे उपकरणों का समुचित भंडार सुनिश्चित करने का भी सरकार को निर्देश दिया।


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