कोरोना मामलों की हालिया वैश्विक बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के सामने आने के बाद केंद्र सरकार की तरफ से वैक्सीनेशन को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं। ओमिक्रोन वेरिएंट को वेरिएंट ऑफ कंसर्न कहा गया है।
देश में फिलहाल 15-17 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों को 3 जनवरी 2022 से टीका लगेगा और ऐसे लाभार्थियों के लिए टीकाकरण विकल्प केवल “कोवैक्सीन” होगा। हेल्थ केयर वर्कर को 10 जनवरी से टीका दिया जाएगा. हेल्थ केयर वर्कर के दोनों डोज के 9 महीने यानी 39 सप्ताह पूरे होने के बाद ही उन्हें प्रीक्रॉशन डोज दिया जाएगा।
60 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी व्यक्ति को टीका दिया जाएगा लेकिन उनके लिए भी शर्त 9 महीने की है। बुजुर्गों को डॉक्टर की सलाह के बाद ही प्रीक्रॉशन डोज दिया जाएगा। सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण के अतिरिक्त निजी अस्पतालों में भी टीकाकरण होगा। लेकिन यहा उहें भुगतान करना होगा। केंद्र ने जिनके पास भुगतान करने की क्षमता है उन्हें निजी अस्पतालों के टीकाकरण केंद्रों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।
अब तक 141 करोड़ से अधिक खुराक देने का मील का पत्थर
90 फीसदी वयस्क देश की आबादी को कम से कम एक खुराक और 62 फीसदी व्यसक आबादी को दोनों खुराकों के साथ कवर किया गया है। COVID टीकाकरण कार्यक्रम के लिए, भारत सरकार ने शीघ्र और सक्रिय पहल की है।
15-18 वर्ष की आयु के नए लाभार्थी
15 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी लोग Co-WIN पर पंजीकरण कर सकेंगे। वे सभी जिनका जन्म वर्ष 2007 या उससे पहले है, पात्र होंगे। लाभार्थी कोविन पर मौजूदा खाते के माध्यम से ऑनलाइन स्व-पंजीकरण कर सकते हैं। अपॉइंटमेंट ऑनलाइन या ऑनसाइट (वॉक-इन) बुक किया जा सकता है।
वहीं कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए बच्चों के लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं। मसलन यदि किसी बच्चे के पास उसका आधार कार्ड नहीं है तो उसके लिए दसवीं का आई कार्ड के माध्यम से भी रजिस्ट्रेशन हो सकता है। इसके अतिरिक्त बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर भी रजिस्ट्रेशन हो सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ऐलान किया था कि अगले साल तीन जनवरी से 15 से 18 साल की आयु के बीच के किशोरों के लिये टीकाकरण अभियान आरंभ किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा था कि 10 जनवरी से स्वास्थ्य और अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों, अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित 60 वर्ष की आयु से ऊपर के लोगों को चिकित्सकों की सलाह पर एहतियात के तौर पर टीकों की खुराक दिए जाने की शुरुआत की जाएगी। हालांकि उन्होंने ‘‘बूस्टर डोज’’ का जिक्र ना करते हुए, इसे ‘‘प्रीकॉशन डोज’’ (एहतियाती खुराक) का नाम दिया।


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