प्रशांत किशोर की कांग्रेस में एंट्री को लेकर G-23 खफा… क्या संदेहास्पद है रणनीतिकार का यह झुकाव?

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राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ कांग्रेस की बैठकें पूरे सप्ताह चलीं और यही कारण है कि सियासी अटकलों का बाजार गरमाया हुआ है।

राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ कांग्रेस की बैठकें पूरे सप्ताह चलीं और यही कारण है कि सियासी अटकलों का बाजार गरमाया हुआ है। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं की प्रशांत किशोर कांग्रेस में शामिल होंगे या नहीं? बता दें कि इस बात पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मिली जुली प्रतिक्रिया है कोई प्रशांत किशोर की कांग्रेस में एंट्री से बहुत खुश और उत्साहित तो बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो कांग्रेस के लिए किशोर के अचानक झुकाव को लेकर संदेहास्पद हैं। 
प्रशांत किशोर को लेकर कांग्रेस में दिख रही मिली जुली प्रतिक्रिया 
बता दें कि कांग्रेस नेताओं और प्रशांत किशोर ने 2024 के लोकसभा चुनावों के रोडमैप पर विचार-विमर्श करने के लिए शुक्रवार तक बैठकें कीं, इसके बाद उन्होंने पार्टी हाईकमान सहित वरिष्ठ नेताओं को लगभग 600 स्लाइड का पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन दिया। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा गठित समिति ने भी अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “जब कोई निर्णय लिया जाएगा तो उससे सभी को सूचित किया जाएगा।”
अब तक कांग्रेस के साथ ज्यादा सफल नहीं रहे हैं प्रशांत किशोर 
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के अधिकांश नेता पीके द्वारा पेश की गई योजना से सहमत हैं, क्योंकि किशोर लोकप्रिय रणनीतिकार हैं, लेकिन कुछ नेता इस मामले में सावधानी बरतने के पक्ष में हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि उन्हें पार्टी में शामिल किया जाएगा या केवल एक सलाहकार की भूमिका तक सीमित रखा जायेगा, यह अभी सोनिया गांधी द्वारा तय नहीं किया गया है।
बताते चलें कि पीके के सफल होने की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती है, हालांकि उनकी सफलता दर अधिक है। 2017 में वह कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन के लिए काम कर रहे थे लेकिन बुरी तरह विफल रहे। वह 2017 में पंजाब में थे लेकिन 2022 के चुनाव से पहले बाहर हो गए। हालांकि, वह टीएमसी, टीआरएस, डीएमके और वाईएसआरसीपी के साथ सफल रहे हैं।
कांग्रेस का जी-23 समूह प्रशांत की एंट्री से नाखुश 
वहीं कांग्रेस का असंतुष्ट समूह जी-23 के सूत्र प्रशांत किशोर को लेकर बहुत प्रभावित नहीं हैं क्योंकि उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व आंतरिक प्रतिभा की अनदेखी कर रहा है और किसी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा कर रहा है जो पार्टी के प्रति वफादार नहीं है और एक पेशेवर सलाहकार है। उनका कहना है कि प्रशांत किशोर कांग्रेस नेतृत्व को जो कुछ बता रहा है, उसे समूह ने सोनिया गांधी को लिखे अपने पत्र और उसके बाद की बैठकों में उठाया है।
किशोर गैर-गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने, संसदीय बोर्ड के पुनरुद्धार, भाई-भतीजावाद को समाप्त करने और पार्टी को चुनावी मशीन में बदलने का सुझाव दे रहे हैं- ये सभी मुद्दे जी-23 समूह द्वारा उठाए गए हैं और यह तभी हो सकता है जब पार्टी जमीनी स्तर से लेकर कांग्रेस कार्यसमिति स्तर तक के आंतरिक चुनाव कराये।
किशोर ने कांग्रेस को दिए यह सुझाव 
कांग्रेस के नेता गांधी परिवार के बाहर किसी के पार्टी का नेतृत्व करने के सुझावों से असहमत हो सकते हैं, लेकिन सूत्र बताते हैं कि किशोर ने पार्टी में बड़े पैमाने पर सुधार का सुझाव दिया है। प्रेजेंटेशन पर रिपोर्ट बनाने के लिए जिन कांग्रेस नेताओं को कहा गया है, उन्होंने सोनिया गांधी को रिपोर्ट सौंप दी है।
पिछले शनिवार किशोर ने सोनिया गांधी और पार्टी के शीर्ष नेताओं के सामने 2024 के चुनावों के लिए एक रोडमैप पेश किया। इसके बाद, गांधी ने इस पर गौर करने और एक सप्ताह के भीतर उन्हें रिपोर्ट करने के लिए एक छोटा समूह नियुक्त किया था। किशोर ने बैठक के दौरान कहा था कि कांग्रेस को 370 से 400 सीटों का लक्ष्य बनाना चाहिए और जहां भी पार्टी कमजोर हो वहां गठबंधन पर काम करना चाहिए। 

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