कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने के लिए भारतीय नागरिकों को रुस और नेपाल के रास्ते से लंबा सफर तय करना पड़ता है। लेकिन अब जल्द ही यात्रियों के लिए एक नये रुट का निर्माण होने जा रहा है। जिसके बाद यात्रा कम समय के भीतर आसानी से पूरी होगी। मानसरोवर के लिए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से एक मार्ग का निर्माण किया जा रहा है।
मंगलवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में जानकारी देते हुए कहा कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से रास्ता बनाया जा रहा है। इस रास्ते के बनने के बाद मानसरोवर पहुंचने के समय में कटौती होने के साथ ही मुश्किल रास्ता पहले से काफी आसान हो जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि साल 2023 यह रास्ता बनकर तैयार होगा, जिसके बाद भारतीय यात्री नेपाल या चीन के बजाय इस रुट से मानसरोवर पहुंचेंगे। नितिन गडकरी ने यह जानकारी भी दी कि इस रास्ते को बनाने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद -5 डिग्री सेल्सियस में भी फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर के जरिए मशीनें पहुंचाई गई है।
ऐसा होगा नए रास्ते का रूट
कैलाश मानसरोवर की ओर बन रहे नए रास्ते को तीन भागों में बनाया जा रहा है। रास्ते का पहला भाग पिथौरागढ़ से तवाघाट तक 107.6 किलोमीटर तक होगा। दूसरा भाग तवाघाट से घटियाबगड़ तक 19.5 किलोमीटर और तीसरा भाग घटियाबगड़ से लिपुलेख दर्रे के बीच 90 किलोमीटर लंबा होगा। तीसरे भाग को केवल पैदल ही पूरा किया जा सकता है, जिसमें करीब 5 दिन का समय लगता है। तवाघाट से घटियाबगड़ तक के रास्ते को दो लेन में बदल दिया गया है। घटियाबगड़ से लिपुलेख दर्रे तक के रास्ते का कार्य निर्माणाधीन है जो 2023 तक बनकर तैयार हो जाएगा।
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जानकारी के लिए बता दे कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए भारत से प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु जाते हैं। कैलाश पर्वत और मानसरोवर के बीच नागरी क्षेत्र शिव का निवास माना जाता है। मानसरोवर झील को काफी पवित्र माना जाता है, मान्यता है कि यहां देवी-देवता स्नान करते हैं। वर्तमान में चीन और नेपाल के रास्ते मानसरोवर यात्रा में 15 से 20 दिन लगते है।


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