राज्यों के पर्यावरण मंत्रियों के सम्मेलन में पीएम मोदी ने नक्सली संगठनों को आड़े हाथों लिया है। पीएम मोदी ने कहा राजनीतिक समर्थत्ता के चलते नक्सली विकास के कार्य को रोक देते थे, पीएम मोदी ने अपने संबोधन में सरदार सरोवर बांध का भी जिक्र किया उन्होनें कहा नक्सलियों ने आकाओं ने कई वर्षों तक बांध का कार्य रोके रखा कि इसके बनने से पर्यावरण का काफी नुकसान होगा। इसी कारण देश को काफी धन का नुकसान झेलना पड़ा। बाधं बनने के बाद उनके दावे खोखले हो गए है।
नक्सलवाद के प्रति सहानुभूति रखने वालों के साथ-साथ कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए कुछ राजनीतिक खेमे अक्सर ‘‘शहरी नक्सल’’ (अर्बन नक्सल) शब्द का इस्तेमाल करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ ये शहरी नक्सली अब भी सक्रिय हैं। मैं आपसे निवेदन करता हूं कि व्यवसाय को सुगम बनाने या जीवन को आसान बनाने वाली परियोजनाओं को पर्यावरण के नाम पर रोका ना जाए। ऐसे लोगों की साजिश से निपटने के लिए हमारे पास एक संतुलित दृष्टिकोण होना चाहिए।’’
अर्बन नक्सल आज भी चुप नहीं, झूठ को स्वीकार करना पंसद नहीं करते
पीएम मोदी ने नक्सलियों को समर्थन वाले लोगों को खूब खरी -खोटी सुनाई वह आज भी अपने झूठ को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्हें ऐसा करने पर राजनीतिक समर्थन मिल जाता हैं , देश में विकास को रोकने के लिए कई वैश्विक संस्थाए भी अपना असली विरोधी स्वरूप दिखाकर तूफान खड़ा कर देती है। इन्हें के सहारे विकास को रोकने के लिए अर्बन नक्सल माथे पर चढ़कर नाचने लगते हैं।
पर्यावरण से समझौता किए बिना भी विकास कार्य किए जा सकते हैं
पर्यावरण सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा कि आज के दौर में बिना इंफ्रस्ट्रक्चर के लोगों के जीवन में विकास को नहीं लाया जा सकता हैं। पर्यावरण की रक्षा से समझौता किए बिना संतुलित रूप से विचार करके आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अर्बन नक्सल झूठे प्रचार से वर्ल्ड बैंक और न्यायपालिका को भी प्रभावित करते हैं।
आपको बता दे की सरदार सरोवर बांध को पीएम मोदी के कार्यकाल में संपन्न किया गया हैं , अन्यथा पर्यावरण की झूठी गोद में खेलकर नक्सली विकास कार्य को प्रभावित करते थे। लेकिन आज के समय नक्सली विकास में बहुत कम रोड़ा अटका रहे हैं। अन्याथा देश के कई राज्यों में नक्सली अपने प्रभाव वाले जिलों में सरकार की योजनाओं को रोक देते थे। सरदार सरोवर बांध का निर्माण कार्य देश की आजादी के बाद ही किया गया था। जिसको पूरा करने में करीब ७० साल लगे। यह कार्य नक्सली ( अर्बन नक्सल ) की वजह से पर्यावरण की दुहाई देकर रोक दिया जाता थ।
नक्सलवाद के प्रति सहानुभूति रखने वालों के साथ-साथ कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए कुछ राजनीतिक खेमे अक्सर ‘‘शहरी नक्सल’’ (अर्बन नक्सल) शब्द का इस्तेमाल करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ ये शहरी नक्सली अब भी सक्रिय हैं। मैं आपसे निवेदन करता हूं कि व्यवसाय को सुगम बनाने या जीवन को आसान बनाने वाली परियोजनाओं को पर्यावरण के नाम पर रोका ना जाए। ऐसे लोगों की साजिश से निपटने के लिए हमारे पास एक संतुलित दृष्टिकोण होना चाहिए।’’
अर्बन नक्सल आज भी चुप नहीं, झूठ को स्वीकार करना पंसद नहीं करते
पीएम मोदी ने नक्सलियों को समर्थन वाले लोगों को खूब खरी -खोटी सुनाई वह आज भी अपने झूठ को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्हें ऐसा करने पर राजनीतिक समर्थन मिल जाता हैं , देश में विकास को रोकने के लिए कई वैश्विक संस्थाए भी अपना असली विरोधी स्वरूप दिखाकर तूफान खड़ा कर देती है। इन्हें के सहारे विकास को रोकने के लिए अर्बन नक्सल माथे पर चढ़कर नाचने लगते हैं।
पर्यावरण से समझौता किए बिना भी विकास कार्य किए जा सकते हैं
पर्यावरण सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा कि आज के दौर में बिना इंफ्रस्ट्रक्चर के लोगों के जीवन में विकास को नहीं लाया जा सकता हैं। पर्यावरण की रक्षा से समझौता किए बिना संतुलित रूप से विचार करके आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अर्बन नक्सल झूठे प्रचार से वर्ल्ड बैंक और न्यायपालिका को भी प्रभावित करते हैं।
आपको बता दे की सरदार सरोवर बांध को पीएम मोदी के कार्यकाल में संपन्न किया गया हैं , अन्यथा पर्यावरण की झूठी गोद में खेलकर नक्सली विकास कार्य को प्रभावित करते थे। लेकिन आज के समय नक्सली विकास में बहुत कम रोड़ा अटका रहे हैं। अन्याथा देश के कई राज्यों में नक्सली अपने प्रभाव वाले जिलों में सरकार की योजनाओं को रोक देते थे। सरदार सरोवर बांध का निर्माण कार्य देश की आजादी के बाद ही किया गया था। जिसको पूरा करने में करीब ७० साल लगे। यह कार्य नक्सली ( अर्बन नक्सल ) की वजह से पर्यावरण की दुहाई देकर रोक दिया जाता थ।


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