भारतीय प्रबंधन संस्थान संशोधन विधेयक, 2023 एक नए कानून को अनुमोदित किया गया। कानून कहता है कि राष्ट्रपति आईआईएम एक विशेष स्कूल के प्रभारी होंगे। इस कानून से असहमत कुछ लोग बैठक छोड़कर चले गए क्योंकि वे किसी और विषय पर बात करना चाहते थे। भारतीय प्रबंध संस्थान संशोधन विधेयक, 2023, मंगलवार को राज्यसभा में पारित हो गया। विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि राष्ट्रपति, आईआईएम की विजिटर यानी कुलाध्यक्ष होंगी। विपक्ष ने मंगलवार दोपहर मणिपुर चर्चा की मांग को लेकर सदन सदन से वाक आउट किया। ऐसे में विपक्ष की गैर-मौजूदगी में यह महत्वपूर्ण विधेयक पारित किया गया। इसका लाभ मुंबई स्थित राष्ट्रीय औद्योगिक इंजीनियरिंग संस्थान को भी मिलेगा।
मिडवाइफरी बिल’ भी पारित किया गया
इस संस्थान को भारतीय प्रबंध संस्थान का दर्जा दिया जा रहा है। इसके अलावा मंगलवार को राज्यसभा में ‘नेशनल डेंटल कमिशन बिल’ और ‘नेशनल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी बिल’ भी पारित किया गया। वर्तमान में, आईआईएम के निदेशक की नियुक्ति ‘सर्च कम सिलेक्शन कमिटी’ की सिफारिशों के आधार पर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा की जाती है। राज्यसभा में पारित किया गया यह विधेयक, बोर्ड को संस्थान का निदेशक नियुक्त करने से पहले विजिटर की मंजूरी लेने का आदेश देता है। निदेशक के चयन की प्रक्रिया केंद्र सरकार द्वारा नियत की जाएगी।
आईआईएम की विजिटर यानी कुलाध्यक्ष होंगी
मंगलवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस विधेयक के कारण मुंबई में भी आईआईएम होगा। शिक्षा मंत्री ने बताया कि विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि राष्ट्रपति आईआईएम की विजिटर यानी कुलाध्यक्ष होंगी। केंद्र के मुताबिक इस विधेयक से इन महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। आईआईएम अपने पाठ्यक्रम और फैकल्टी के विषय में निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होंगे।


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