सत्यपाल मलिक (Satya Pal Malik) का मेघालय के राज्यपाल के रूप में आज (30 सितंबर) को कार्यकाल पूरा हो रहा है। उनके राष्ट्रीय लोकदल (RLD) में शामिल होने की अटकलों पर अपनी इस टिप्पणी से विराम लगा दिया है कि ‘वर्तमान पद से सेवानिवृत्ति के बाद अभी तक मेरे पास कोई योजना नहीं है। केवल किसानों से जुड़ी गतिविधियों में भाग लूंगा, न तो कोई चुनाव लडूंगा, न किसी दल में शामिल होउंगा।
केंद्र से विरोध के बाद सुर्खियों में आए
मलिक के राष्ट्रीय लोकदल (RLD) में शामिल होने के कयास उन विज्ञापनों को देखने के बाद लग रहे थे, जिनमें दिखाया गया था कि वह शामली जिले में तीन अक्टूबर को आयोजित एक ‘किसान सम्मेलन’ में RLD प्रमुख जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) के साथ मंच साझा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया ‘‘ शामली की सभा एक गैर राजनीतिक थी और किसानों के लिए आहूत की गई थी, हालांकि धारा 144 लागू होने के चलते इसे रद्द कर दिया गया है। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन करने वाले किसानों का मलिक ने मेघालय के राज्यपाल के पद पर रहते हुए समर्थन किया और सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। उन्होंने जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) का राज्यपाल रहते हुए कथित भ्रष्टाचार का मामला उठाया था।
जानें ! मलिक का राजनीतिक सफर
सत्यपाल मलिक 24 जुलाई 1946 को बागपत जिले में पैदा हुए और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय क्रांति दल, लोक दल , जनता दल और समाजवादी पार्टी आदि राजनीतिक दलों से जुड़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे।मलिक 30 सितंबर 2017 को बिहार के राज्यपाल के नियुक्त हुए थे। इसके बाद उन्हें अगस्त 2018 में जम्मू-कश्मीर और फिर 2020 में मेघालय में राज्यपाल पद पर भेजा गया। मलिक 30 सितंबर 2017 को बिहार के राज्यपाल के नियुक्त हुए थे। इसके बाद उन्हें अगस्त 2018 में जम्मू-कश्मीर और फिर 2020 में मेघालय में राज्यपाल पद पर भेजा गया।


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