सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को अचानक छु्ट्टी पर भेजे जाने और केंद्र सरकार द्वारा उनके अधिकार वापस लेने को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए इस केस में केंद्रीय सतर्कता आयोग को CBI निदेशक और विशेष निदेशक के मामले की दो हफ्ते में जांच पूरी करने का आदेश दिया। यह जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज एके पटनायक की निगरानी में होगी। सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील फली नरीमन ने आलोक वर्मा की तरफ से पैरवी की। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव केवल रूटीन के काम निपटाएंगे और कोई नीतिगत फैसला नहीं लेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने राव की तरफ से लिए गए फैसलों की लिस्ट भी बंद लिफाफे में मांगी है। अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी।
मंगलवार की देर रात सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को सरकार ने छुट्टी पर भेज दिया था और एम नागेश्वर राव को अस्थायी डायरेक्टर बनाया था। नागेश्वर ने देर रात 1.30 बजे कार्यभार संभाल लिया था। बुधवार को वित्त मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि सीवीसी की सलाह पर दोनों अफसरों को छुट्टी पर भेजा गया है। क्योंकि जिन पर आरोप है उन अधिकारियों के रहते निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार 11.30 बजे आदेश दिया कि नागेश्वर राव केवल रूटीने के काम देखेंगे, कोई नीतिगत फैसला नहीं लेंगे। यानी कुर्सी संभालने के 60 घंटे में ही नागेश्वर राव सिर्फ नाम के निदेशक रह गए हैं।
बता दे नागेश्वर राव ने पद संभालते ही 13 सीबीआई अफसरों को हटा दिया था। इनमें से कई के ट्रांसफर कर दिए थे तो कुछ की जिम्मेदारियों में बदलाव कर दिया था। उन्होंने दोनों अधिकारियों पर लगे आरोपों की जांच करने के लिए एसआईटी भी बना दी थी। मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले गुरुवार को सीबीआई के प्रवक्ता ने सफाई दी थी दोनों अधिकारियों को केवल छुट्टी पर भेजा गया है। आलोक वर्मा अभी भी सीबीआई डायरेक्टर हैं और राकेश अस्थाना स्पेशल डायरेक्टर. नागेश्वर राव तब तक अस्थायी डायरेक्टर बने रहेंगे जब तक इस मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती।
नागेश्वर ने इनको दिखाया था रास्ता
- अजय बस्सी– बस्सी दिल्ली हेडक्वार्टर में डिप्टी एसपी के पद पर तैनात थे और राकेश अस्थाना घूसकांड की जांच कर रही टीम का नेतृत्व कर रहे थे। इनको पोर्ट ब्लेयर भेज दिया था।
- एसएस ग्रूम– एडिशनल एसपी एसएस ग्रूम का ट्रांसफर जबलपुर कर दिया। इन पर डिप्टी एसपी देवेंद्र कुमार की गिरफ्तारी और उनसे जबरदस्ती कोरे कागज पर दस्तखत कराने का आरोप है।
- ए. के. शर्मा– ए के शर्मा सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के करीबी माने जाते हैं और इनका भी ट्रांसफर कर दिया गया।
- ए साईं मनोहर– मनोहर को राकेश अस्थाना का करीबी माना जाता है इन्हें चंडीगढ़ भेज दिया गया।
- वी मुरुगेसन को चंडीगढ़ भेज दिया गया।
- अमित कुमार– डीआईजी की जिम्मेदारी संभाल रहे अमित कुमार को JD, AC1 में नियुक्त दी गई।
- मनीष सिन्हा– ये डीआईजी का पद संभाल रहे थे और इनका ट्रांसफर नागपुर कर दिया।
- तरुण गौबा– ये भी डीआईजी हैं और इन्हें चंडीगढ़ से दिल्ली बुला लिया।
- जसबीर सिंह– ये डीआईजी हैं और इन्हें बैंक धोखाधड़ी विंग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
इनके अलावा के आर चौरसिया, रण गोपाल और सतीश डागर की जिम्मेदारियों में भी बदलाव कर दिया।
जांच टीम में तीन नए नाम जोड़े
एसपी सतीश डागर, एक्टिंग ज्वाइंट डायरेक्टर वी. मुरुगुशन और डीआईडी तरुण गौबा को अस्थाना के खिलाफ जांच कर रही टीम में लगाया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमुख बातें…
- कोर्ट ने कहा, सीबीआई निदेशक का कामकाज देख रहे एम नागेश्वर राव कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं लेंगे।
- नागेश्वर राव ने 23 अक्टूबर की नियुक्ति की तिथि से आज तक ट्रांसफ़र-पोस्टिंग या किसी भी तरह के फ़ैसले लिए है वे सब सीलबंद लिफ़ाफ़े में अगली सुनवाई पर कोर्ट मे पेश किए जाएं- SC
- सीबीआई डायरेक्ट आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ 2 हफ्तेे में सीवीसी जांच पूरी करें और यह सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की निगरानी में हो- SC
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि दस दिन में जांच पूरी नहीं कर सकते, और समय दिया जाना चाहिए।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सीबीआई के बदले गए जांच अधिकारियों की लिस्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को दी जाए।
- छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।
- राकेश अस्थाना की तरफ से पेश मुकुल रोहतगी ने कहा कि उनकी याचिका भी सुनी जानी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपकी याचिका आज सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं है, लिहाजा, आपकी याचिका किसी और दिन सुनी जाएगी।
- फली नरीमन ने उच्चतम न्यायालय से कहा: सीबीआई निदेशक की नियुक्ति प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और सीजीआई के पैनल वाली चयन समिति की मंजूरी से की गई।
- नरीमन ने सीवीसी और केंद्र सरकार द्वारा वर्मा के अधिकार छीनने का हवाला दिया. उन्होंने वर्मा की याचिका के पक्ष में विनीत नारायण के फैसले का भी हवाला दिया।
- केंद्र सरकार और सीबीआई सीवीसी की सीलबंद रिपोर्ट 10 दिन के भीतर अदालत में पेश करेंगे : उच्चतम न्यायालय
- उच्चतम न्यायालय ने वर्मा और एनजीओ कॉमन कॉज की याचिकाओं पर सीबीआई और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।
- उच्चतम न्यायालय ने कहा कि राव के द्वारा 23 अक्टूबर तक लिया गया कोई फैसला लागू नहीं होगा।
- मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को मुकर्रर की गई है।


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