हाल ही के आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में सबसे अधिक 7 बाघों की मौत टाइगर रिजर्व के बाहर कुमाऊ रीजन में हुई है | आपको बता दें कि भारत में सिर्फ 6 महीनों में ही 95 बाघों की मौत हो चुकी है | अगर बात मध्यप्रदेश की कीजाए तो इस साल अब तक 24 टाइगर दम तोड़ चुके हैं | आपको बता दें कि विशाखापत्तनम के इंदिरा गांधी प्राणी उद्यान में 24 घंटे के भीतर दो और बाघों की मौत हो गई है। वहीं, देश में इस वर्ष के शुरुआती छह महीनों में 95 से अधिक बाघों की जान जा चुकी है। बता दें कि इंदिरा गांधी प्राणी उद्यान में जानकी नाम की बाघिन की वृद्धावस्था के कारण मौत हो गई। उसके शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। वहीं, एनिमल रेस्क्यू सेंटर में कुमारी नाम की एक बाघिन की भी देर रात मौत हो गई थी। प्राणी उद्यान की क्यूरेटर नंदनी सलारिया ने बताया कि बाघिन की उम्र औसत आयु से अधिक हो गई थी।
वन मंत्रालय ने क्या कहा?
इसी बीच वन मंत्रालय ने जांच के आदेश दे दिए हैं | आपको बता दें कि प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरा होने पर इस साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 की बाघ गणना के आंकड़े जारी किए थे | इसके अनुसार 2018 में अब तक देश में 200 बाघ बढ़े हैं | लेकिन 2023 के शुरुआती 6 महीने में ही इसके आधे बाघों की मौत हो चुकी | इस साल 25 जून तक देशभर में 95 बाघों की मौत रिकॉर्ड की गई है। इनमें सबसे अधिक मध्य प्रदेश में 24, महाराष्ट्र में 19 और उत्तराखंड 14 बाघों की मौत हुई है। इस मामले में केंद्रीय वन मंत्रालय ने सभी राज्यों में जांच के आदेश दिए हैं।
इसी बीच अगर बात उत्तराखंड की कीजाए तो उत्तराखंड में सबसे अधिक सात बाघों की मौत टाइगर रिजर्व के बाहर कुमाऊं रीजन में हुई है, जबकि पांच बाघों की मौत कार्बेट टाइगर रिजर्व और दो बाघों की मौत राजाजी टाइगर रिजर्व में हुई है। पिछले दिनों कार्बेट की कालगढ़ रेंज में एक घायल बाघिन भी मिली थी, जिसके पेट के चारों और गोलाई में लोहे की तार का फंदा धंसा हुआ था।
जानकारी के लिए बता दे कि साल 2018 की गणना के अनुसार, 526 बाघों के साथ मध्य प्रदेश पहले स्थान पर है। 524 बाघों के साथ कर्नाटक दूसरे और 442 बाघों के साथ उत्तराखंड तीसरे स्थान पर है।


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