नियम 267 के तहत मणिपुर हिंसा पर क्यों नहीं बात करना चाहती है सरकार? जानिए पुरे मुद्दे का हाल

Summary :

मणिपुर वो हिंसा जिसने कई ज़िन्दगियों को बर्बाद कर दिया. जिसकी वजह से कई मासूमों को मौत का सामना करना पड़ा. अब इस हिंसा को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच घमासान युद्ध होता हुआ नज़र आ रहा है. बता दें की संसद में नियम 267 और 176 को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच बात नहीं बन रही.

मणिपुर वो हिंसा जिसने कई ज़िन्दगियों को बर्बाद कर दिया. जिसकी वजह से कई मासूमों को मौत का सामना करना पड़ा. अब इस हिंसा को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच घमासान युद्ध होता हुआ नज़र आ रहा है. जिसमें 24 जुलाई में हुए विपक्षी दलों के धरना प्रदर्शन को लेकर साफ़ तय है की अब विपक्ष और सरकार के बीच संसद में बात बन ही नहीं पा रही है. बता दें की संसद में नियम  267 और नियम 176 को लेकर संग्राम युद्ध छिड़ चूका है. अब सवाल ये उठता है की ऐसा इस नियम में है क्या की सरकार और विपक्ष दोनों के बीच इसको लेकर घमासान युद्ध हो रहा है?
मणिपुर मुद्दा फंसा नियम 267 और 176 पर 
मणिपुर में अब लोग अपनी बची हुई ज़िन्दगी को बचाने में लगे हुए हैं, और इस मुद्दे को लेकर राजधानी दिल्ली में हो रहे संग्राम को देखा जा सकता है. बता दें की राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को पुरे मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है. लेकिन बात यहीं पर आकर नहीं रुकी है, बल्कि ये मुद्दा नियम 267 और 176 पर आकर रुक चुका है. बता दें की सरकार मणिपुर हिंसा को लेकर चर्चा करने के लिए मान तो गयी है, लेकिन विपक्ष चाहता है की नियम 267 चर्चा हो, लेकिन सरकार वो नियम 176 के तहत चर्चा करें. और इसी वजह से दोनों गुटों के बीच एक युद्ध छिड़ चुका है. 
क्या है नियम 267 और 176?
नियम  267  के अंदर चर्चा होने के बाद वोटिंग का प्रावधान है, लेकिन नियम 176 में चर्चा होने के बाद वोटिंग का प्रावधान नहीं है. इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा है की विपक्ष इस चर्चा को लेकर भाग रही है, क्योंकि विपक्ष को अपने राज्यों में हो रही महिलाओं के साथ घटना को लेकर भी चर्चा करनी होगी. और कांग्रेस राजस्थान, छत्तीसगढ और बंगाल में हुई महिलाओं के साथ घटना को लेकर चर्चा नहीं करना चाहती है. 

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