Bulandshahr: बुलंदशहर में लगातार हुई बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसे में 10 वर्षीय छात्रा चारु कश्यप खुले नाले में बह गई थी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में चिंता का माहौल बन गया। चारु कक्षा चार की छात्रा थी और हादसे के बाद से उसका कोई पता नहीं चल पा रहा था। परिवार और स्थानीय लोग लगातार उसकी तलाश में जुटे रहे, लेकिन कई दिनों तक कोई सफलता नहीं मिली।
छात्रा के लापता होने के बाद प्रशासन ने बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया। राहत और बचाव कार्य के लिए NDRF, SDRF, पीएसी और अन्य टीमों को लगाया गया। कई दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर तलाश की गई, लेकिन चारु का कोई सुराग नहीं मिला। लगातार कोशिशों के बावजूद जब सफलता नहीं मिली तो प्रशासन ने अनुभवी गोताखोरों की मदद लेने का फैसला किया।
बागपत से बुलाए गए छह अनुभवी मुस्लिम गोताखोर

इसके बाद बागपत से छह अनुभवी मुस्लिम गोताखोरों की टीम को बुलाया गया। इन गोताखोरों ने बिना समय गंवाए काली नदी में सर्च अभियान शुरू किया। टीम ने लगातार करीब 13 घंटे तक पानी में रहकर अलग-अलग स्थानों पर तलाश की। आखिरकार चावली गांव के पास काली नदी से चारु कश्यप का शव बरामद कर लिया गया।
चार दिन से लापता छात्रा का शव मिलने के बाद परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
गोताखोर इरफान बोले- हमारा मकसद सिर्फ इंसानियत की सेवा

गोताखोरों की टीम का नेतृत्व कर रहे इरफान ने बताया कि वह पिछले 26 वर्षों से नदियों, नहरों और अन्य जल स्रोतों में राहत एवं बचाव कार्य कर रहे हैं। उनके अनुसार, अब तक वह 250 से ज्यादा लोगों की जान बचा चुके हैं। इसके अलावा कई ऐसे मामलों में भी उन्होंने मदद की है, जहां लापता लोगों के शवों को खोजने का काम किया गया।
इरफान ने कहा कि उनकी टीम का एक ही उद्देश्य है—जरूरतमंद लोगों की मदद करना। उन्होंने बताया कि जब भी कहीं से सूचना मिलती है, उनकी टीम बिना किसी भेदभाव के राहत और बचाव कार्य के लिए पहुंच जाती है। उनके लिए इंसानियत सबसे बड़ी पहचान है।
लोगों ने की गोताखोरों की जमकर सराहना

चारु का शव बरामद होने के बाद बुलंदशहर और बागपत के लोगों ने गोताखोरों के साहस और समर्पण की खुलकर तारीफ की। लोगों का कहना है कि कठिन हालात में भी टीम ने हार नहीं मानी और लगातार 13 घंटे तक खोज अभियान चलाकर अपना कर्तव्य निभाया।
स्थानीय लोगों ने कहा कि इस अभियान ने यह संदेश दिया है कि संकट की घड़ी में इंसानियत सबसे ऊपर होती है। गोताखोरों ने अपने साहस, धैर्य और सेवा भाव से समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। उनका यह प्रयास लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
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