अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ियों और चोरी के आरोपों को लेकर प्रसिद्ध कथावाचक Devkinandan Thakur statement on Ram Mandir loot case काफी चर्चा में है। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने कड़ी नाराज़गी जताई और कहा कि मंदिर में भक्तों द्वारा दिया गया पैसा देवता की सेवा और धार्मिक कार्यों के लिए होता है। उन्होंने कहा कि जो कोई भी मंदिर के फंड का गलत इस्तेमाल करता है या उसे हड़पने की कोशिश करता है, वह बहुत बड़ा पाप करता है। उनके अनुसार, ऐसे लोगों को अपने कामों का नतीजा ज़रूर भुगतना पड़ता है। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की।
देवकीनंदन ठाकुर की चेतावनी
बड़ी ख़बर-
राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर फट पड़े कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर।
कहा-
“मंदिर के धन को खाने वाला 60 हजार साल तक मल का कीड़ा बनेगा।
अधिकारियों को मंदिर से बाहर करो।
योगी से कहूंगा कि वे चार शंकराचार्य में से किसी एक को, जो उन्हें सबसे अधिक प्रिय हो,
उसी को अध्यक्ष बनाकर… pic.twitter.com/y6g27seBTj
— abhishek upadhyay (@upadhyayabhii) June 16, 2026
वक्ता ने कहा कि मंदिरों के प्रबंधन और रखरखाव की ज़िम्मेदारी ऐसे लोगों को सौंपी जानी चाहिए जिन्हें धर्म और सनातन परंपराओं की गहरी समझ हो। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासनिक अधिकारियों के बजाय धार्मिक नेताओं और विद्वानों को ज़्यादा ज़िम्मेदारी दी जानी चाहिए। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से आग्रह करेंगे कि मंदिर प्रशासन की अहम ज़िम्मेदारी चार मुख्य शंकराचार्यों में से किसी एक को सौंपी जाए। उनका मानना है कि इससे भविष्य में Ram Mandir Donation Case जैसे विवादों को रोका जा सकेगा और मंदिरों की पारदर्शिता भी बढ़ेगी। उन्होंने सनातन परंपरा के लिए एक स्पष्ट व्यवस्था और नियम स्थापित करने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।
श्रद्धालुओं में बढ़ा आक्रोश, कार्रवाई की मांग तेज
राम मंदिर से जुड़े इस विवाद ने देश भर में सनातन धर्म के अनुयायियों और भक्तों के बीच चिंता पैदा कर दी है। Ram Mandir Donation theft के आरोपों के सामने आने के बाद कई लोग दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि भगवान राम के नाम पर किसी भी तरह की अनियमितता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने भरोसा जताया कि सच जल्द ही सामने आएगा और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे कानून के मुताबिक सज़ा दी जाएगी। इस पूरे मामले ने एक बार फिर मंदिर प्रबंधन और धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता की ज़रूरत को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।


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