सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को 19 मई को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया, जिसने “शिवलिंग” के कार्बन डेटिंग सहित “वैज्ञानिक सर्वेक्षण” का निर्देश दिया है। पिछले साल एक वीडियोग्राफिक सर्वेक्षण के दौरान वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पाया गया था।भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि वह “शिवलिंग” की उम्र निर्धारित करने के लिए एएसआई द्वारा वैज्ञानिक जांच के उच्च न्यायालय के हालिया आदेश के खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति द्वारा दायर अपील पर शुक्रवार को सुनवाई करेगी।
हिंदू पक्ष द्वारा “शिवलिंग” और मुस्लिम पक्ष द्वारा “फव्वारा” होने का दावा
ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने मामले की तत्काल सुनवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपील लंबित होने पर एक आदेश पारित किया है। सर्वेक्षण के दौरान, एक संरचना – जिसे हिंदू पक्ष द्वारा “शिवलिंग” और मुस्लिम पक्ष द्वारा “फव्वारा” होने का दावा किया गया था – पिछले साल 16 मई को मस्जिद के एक अदालती अनिवार्य सर्वेक्षण के दौरान मस्जिद परिसर में पाया गया था। काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित है।
कानून के अनुसार आगे बढ़ने का दिया निर्देश
उच्च न्यायालय ने 12 मई को वाराणसी के जिला न्यायाधीश के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें 14 अक्टूबर, 2022 को “शिवलिंग” के वैज्ञानिक सर्वेक्षण और कार्बन डेटिंग के लिए आवेदन को खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय ने वाराणसी के जिला न्यायाधीश को “शिवलिंग” की वैज्ञानिक जांच करने के लिए हिंदू उपासकों के आवेदन पर कानून के अनुसार आगे बढ़ने का निर्देश दिया। निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं लक्ष्मी देवी और तीन अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।


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