हरिद्वार से ‘जिम कांवड़’ लेकर निकले युवा, डंबल उठाकर दे रहे नशा मुक्ति का संदेश

Summary :

सावन की कांवड़ यात्रा में इस बार 'जिम कांवड़' आकर्षण का केंद्र बनी है। हरियाणा के चार युवा डंबल और फिटनेस के साथ हरिद्वार से गंगाजल लाकर नशा मुक्ति का संदेश फैला रहे हैं।

Anti Drug Campaign Kanwar

Anti Drug Campaign Kanwar : सावन की कांवड़ यात्रा में इस बार एक ऐसी ‘जिम कांवड़’ ने एंट्री मारी है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह कांवड़ सिर्फ आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि नशा मुक्ति का संदेश लेकर चल रही है। हरियाणा के चार युवा शिवभक्त गांव-गांव जाकर युवाओं को नशा छोड़ने की शपथ दिला रहे हैं, बच्चों को जिम और फिटनेस से जोड़ रहे हैं और समाज में नई अलख जगा रहे हैं।

जिम कांवड़ की तेज चर्चा

भोले के जयकारे… हजारों कांवड़िए… लेकिन इन सबके बीच सबसे ज्यादा चर्चा जिस कांवड़ की हो रही है, वह है ‘जिम कांवड़’। डंबल, फिटनेस और जोश से सजी यह अनोखी कांवड़ जहां भी पहुंचती है, वहां लोग रुक जाते हैं, कैमरे निकल आते हैं और युवा इनके साथ जुड़ने लगते हैं।

दिल्ली के नजफगढ़ के मुंडेरा कला गांव के रहने वाले अमित, सोनू पहलवान, चिंटू राठी और गोलू राठी 22 जुलाई को हरिद्वार से गंगाजल लेकर निकले थे। 10 अगस्त को ये अपने गांव पहुंचेंगे, लेकिन उससे पहले इन्होंने नशा मुक्ति की मुहिम छेड़ दी है।

डंबल उठा कर संकल्प

रास्ते में जहां भी इनका काफिला रुकता है, वहां बच्चे और युवा खुद इनके पास पहुंच जाते हैं। कोई पुश-अप लगाता है, कोई डंबल उठाता है और फिर सभी एक साथ संकल्प लेते हैं—”नशा नहीं करेंगे… और किसी को करने भी नहीं देंगे।”

चारों शिवभक्तों का कहना है कि सरकार और पुलिस अपना काम कर रही है, लेकिन जब तक समाज और युवा खुद आगे नहीं आएंगे, तब तक नशे के खिलाफ लड़ाई पूरी तरह नहीं जीती जा सकती। इसलिए उन्होंने अपनी कांवड़ यात्रा को ही जनजागरण का अभियान बना दिया है।

100 से अधिक ने ली नशा छोड़ने की शपथ

हरिद्वार से बागपत तक के सफर में 100 से ज्यादा बच्चे और युवा नशा छोड़ने और फिटनेस अपनाने का संकल्प ले चुके हैं। कई गांवों के ग्राम प्रधानों ने इनका नोटों की माला पहनाकर सम्मान किया और अपने-अपने गांव को नशा मुक्त बनाने का वादा भी किया।

भोले की भक्ति के साथ समाज को नई दिशा देने निकले ये चार युवा अब जहां भी पहुंच रहे हैं, वहां सिर्फ हर-हर महादेव के जयकारे ही नहीं, बल्कि “नशा छोड़ो… जिम जोड़ो” का संदेश भी गूंज रहा है।

सावन की यह जिम कांवड़ अब सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि युवाओं को फिटनेस और नशा मुक्ति का संदेश देने वाला चलता-फिरता अभियान बन चुकी है। यही वजह है कि यह अनोखी कांवड़ हर पड़ाव पर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।