Kalpeshwar Mahadev Mandir: कल्पेश्वर मंदिर में शिव की जटाओं की क्यों होती है पूजा? जानें क्या है खास?

Summary :

Kalpeshwar Mahadev Mandir: सावन का महीना चल रहा है। आज 23 जुलाई को सावन शिवरात्रि भी है। हर तरफ बोल-बम के नारे गूंज रहे हैं। आज हम उस मंदिर के दर्शन करेंगे जहां भोले बाबा की जटाओं की पूजा होती है। उत्तराखंड में चमोली जिले के हेलंग से लगभग 30km की दूरी पर स्थित है पंचकेदार में पांचवा केदार-कल्पेश्वर। उर्गम घाटी में स्थित कल्पेश्वर मंदिर समुंद्र तल से लगभग 2134 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। (Kalpeshwar Mahadev Mandir) पंचकेदार में से एकमात्र ऐसा मंदिर है जो साल पर भक्तों के लिए खुला रहता हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भोलेनाथ…

Kalpeshwar Mahadev Mandir: सावन का महीना चल रहा है। आज 23 जुलाई को सावन शिवरात्रि भी है। हर तरफ बोल-बम के नारे गूंज रहे हैं। आज हम उस मंदिर के दर्शन करेंगे जहां भोले बाबा की जटाओं की पूजा होती है। उत्तराखंड में चमोली जिले के हेलंग से लगभग 30km की दूरी पर स्थित है पंचकेदार में पांचवा केदार-कल्पेश्वर। उर्गम घाटी में स्थित कल्पेश्वर मंदिर समुंद्र तल से लगभग 2134 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। (Kalpeshwar Mahadev Mandir) पंचकेदार में से एकमात्र ऐसा मंदिर है जो साल पर भक्तों के लिए खुला रहता हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भोलेनाथ ने यहां स्थित कुंड से समुंद्र मंथन के लिए जल पात्र में जल दिया, जिससे चौदह रत्नों की उत्पत्ति हुई।

Kalpeshwar Mahadev Mandir: दुर्वासा ऋषि ने की थी तपस्या

Kalpeshwar Mahadev Mandir

बता दें कि दुर्वासा ऋषि ने यहां स्थित कल्पवृक्ष के नीचे भगवान शिव की तपस्या की थी, जिस वजह से कल्पेश्वर नाम दिया गया है। कल्पेश्वर को कल्पनाथ के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ हर साल शिवरात्रि पर एक विशेष मेला लगता है। (Kalpeshwar Mahadev Mandir) मंदिर में भगवान शिव के जटा स्वरूप की पूजा की जाती है। हालांकि, एक विशाल चट्टान के नीचे एक छोटी सी गुफा में स्थित मंदिर के गर्भगृह की तस्वीरें लेना मना है, लेकिन आंख जैसे दिखने वाले कैमरे से देखने पर इस स्थान की दिव्यता और भव्यता का एहसास होता है।

Kalpeshwar Mahadev Mandir:  भगवान शिव के जटाधारी स्वरूप की पूजा

Kalpeshwar Mahadev Mandir

मंदिर के अंदर जहां भगवान शिव के जटाधारी स्वरूप की पूजा होती है, वहां लिपटे रुद्राक्ष की मालाएं भगवान शिव का नाम जपती हुई प्रतीत होती हैं। चाँदी का छत्र जटाओं को छाया प्रदान करता प्रतीत होता है। एक ओर भगवान गणेश हैं और दूसरी ओर जटाओं में लिपटे साँप, मानो भगवान शिव के रक्षक हों।

मंदिर के प्रांगण में भगवान शिव से संबंधित नंदी, त्रिशूल, डमरू, भस्म, शिवलिंग आदि की पूजा की जाती है। प्रांगण में स्थित दो छोटे मंदिरों में से एक में कैलाश पर्वत पर विराजमान भगवान शिव-पार्वती और उनके बगल में विराजमान गणेश की पूजा की जाती है, जबकि दूसरे मंदिर में हनुमान की पूजा की जाती है। सावन के महीने में हजारों भक्त कल्पेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।

How to Reach Kalpeshwar Mahadev Temple?

कल्पेश्वर के लिए हेलंग से उर्गम गांव तक का रास्ता एकतरफ़ा है और काफ़ी अच्छा है। (Kalpeshwar Mahadev Mandir) निर्माण के बावजूद, भूस्खलन के कारण सड़क कई जगहों पर टूटी हुई है। सावन के महीने में बारिश के कारण सड़क कई जगहों पर टूटी हुई है और खड़ी ढलानों पर गाड़ी चलाना मुश्किल हो सकता है, इसलिए जब भी आप अपने वाहन से कल्पेश्वर आएं, तो ध्यान रखें कि वाहन पहाड़ की खड़ी ढलान पर चढ़ने के लिए पर्याप्त शक्तिशाली हो। जोशीमठ तक सड़क मार्ग द्वारा सागर गांव से होलंग और फिर उर्गम गांव होते हुए पहुंचा जा सकता है, जिसके बाद एक छोटा रास्ता मंदिर तक जाता है।

क्या है Kalpeshwar Mandir Darshan Timings?

कल्पेश्वर मंदिर सुबह 6 बजे खुलता है और आरती के बाद शाम 7 बजे बंद हो जाता है; यहां आने का सबसे अच्छा समय मई से अक्टूबर के बीच है।

Also read:Naag Panchami Vrat Katha 2025: कब है नागपंचमी? जानें इसका महत्व और कथा

Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।