सावन में रुद्राभिषेक के नियम

1. पूजा के लिए सही दिशा चुनें
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) सबसे पवित्र माना जाता है। रुद्राभिषेक के लिए इसी दिशा का चुनाव करें। इस जगह को बहुत अच्छे से साफ करें। सफाई के बाद वहां गंगाजल छिड़कें। ध्यान रखें कि जहां शिवलिंग और शिव परिवार की स्थापना हो रही है, वह जगह एकदम साफ-सुथरी हो।
2. मेन गेट की सफाई करें
पूजा वाले दिन घर के मुख्य दरवाजे की अच्छे से सफाई करें। एक बर्तन में पानी लेकर उसमें थोड़ा गंगाजल मिलाएं और उसे मेन गेट पर छिड़कें। इसके साथ ही दरवाजे पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं। वास्तु के अनुसार, तोरण लगाने से घर में पॉजिटिव एनर्जी आती है। तोरण लगाने के बाद दरवाजे के दोनों तरफ स्वास्तिक का निशान भी बनाएं।
3. पूजा की जगह पर फालतू सामान न रखें
जिस कमरे में रुद्राभिषेक होना है, वहां रखा बेकार और फालतू सामान हटा दें। ध्यान रखें कि उस कमरे में पुराने कपड़े, गंदे जूते-चप्पल या चमड़े का कोई सामान न हो। पूजा की जगह पर कोई भारी सामान भी न रखें। यह जगह जितनी खुली और साफ रहेगी, उतना ही अच्छा होगा।
4. पूजा से पहले धूपबत्ती या लोबान का धुआं दिखाएं
रुद्राभिषेक वाले दिन पूरे घर की अच्छे से सफाई करें। घर में धूपबत्ती या लोबान का धुआं दिखाएं। वास्तु में इसे बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और माहौल शांत बनता है। घर का वातावरण जितना सकारात्मक होगा, पूजा उतनी ही सफल मानी जाएगी।



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