कभी दीवार, कभी गेट, तो कभी टंकी पर आये दिन कही न कही छिपकली तो दिख ही जाती हैं। खासतौर पर इस बारिश के मौसम में तो ज़रूर ही हर जगह आपने छिपकली को देखा ही होगा और ये भी जानते होंगे कि इसकी 1 पूंछ भी होती हैं हेना? लेकिन क्या हो अगर हम आपको कहे कि ये बात गलत हैं ? सोच रहे होंगे न कि ये क्या बहकी-बहकी बातें कर रहे हैं हम?

छिपकली को आपने अक्सर देखा होगा, लेकिन तीन पूंछ वाली छिपकली को आपने शायद ही देखा हो. यह दुर्लभ छिपकली मध्य प्रदेश के सागर शहर के बाघराज वार्ड के पंडापूरा में रहने वाले रामचरण पटेल के घर में देखी गई. उनके नाती कमलेश पटेल ने अपने मोबाइल से तीन पूंछ वाली छिपकली का वीडियो बना कर घरवालों को दिखाया. धीरे-धीरे यह बात पूरे शहर में फैल गई. इसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है.

तीन पूंछ की छिपकली को देखना शुभ होता है या अशुभ. यदि यह घर में है, तो कैसे हैं संकेत… इसको लेकर तरह-तरह के दावे किये जा रहे हैं. डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय की कीट वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर वर्षा शर्मा बताती हैं कि वायरल वीडियो में दिख रही हाउस लिजर्ड किसी भी घरेलू आम छिपकली जैसी है. इसको हम जूलॉजिकल भाषा में हेमिडैक्टाएलस कहते हैं. छिपकली में एक फिनोमिना प्रोसेस होती है जिसमें अगर इसके शरीर का कोई पार्ट कट जाए तो उसमें वो क्षमता होती है कि धीरे-धीरे कटे हिस्से को फिर से नया बना ले. इसको रीजेनरेशन कहते हैं, लेकिन इस केस में इसको ऑटोटोमी कहते हैं.

उन्होंने कहा कि जब कोई शत्रु छिपकली के ऊपर अटैक करता है तो वो अपनी बॉडी का उतना पार्ट शरीर से अलग कर देती है. अपने बचाव के लिए यह मिमिक्री कहलाती है, लेकिन इस केस में छिपकली के एक जगह पर दो या तीन पूंछ बन गई है.

प्रोफेसर वर्मा ने कहा कि जिनके घर में ऐसी छिपकली निकलती है तो आस-पास के लोग अक्सर घबरा जाते हैं. उसको बहुत कुछ धर्म से भी जोड़ते हैं. कई तरह की भ्रांतियां होती हैं. इस केस में क्या है कि छिपकली की पूंछ कट गई है. कटने के बाद उसने अपनी पूंछ को रीजेनरेट कर लिया. बहुत रेयर केस होते हैं कि छिपकली में दो पूंछ बने, लेकिन यहां इसकी तीन पूंछ है. ऐसा हमेशा नहीं होता है.

उन्होंने कहा कि यह रेयर देखने को मिलता है. हमने कुछ किताबों में पढ़ा है कि जहां पर तीन पूंछ वाली छिपकली दिखाई देती है, उसे बहुत शुभ माना जाता है, लेकिन इसे देखने से वाकई में कोई शुभ समाचार मिलेगा या नहीं, इस बारे में कुछ कह नहीं सकते. लेकिन घरवालों को डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. इसको एक नेचुरल प्रोसेस के तौर पर देखा जाना चाहिए.


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