भारत अंतरिक्ष में यात्रियों को भेजने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में भारत के चंद्रयान -3 के विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा पर अपने लक्ष्यों को पाकर दुनिया में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का नाम बना दिया है। अब इसके बाद इसरो अपने आगे के मिशन में जुट गया है। बीते दिनों इसरो में चाँद के बाद सूर्य की और भी अपने कदम बढ़ाए और आदित्या एल1 को सूरज देव के जांच के लिए भेजा है। जिसके बाद इसरो आपने आने वाले मिशन गगनयान की तैयारी में जुट गया है।
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भारत के गगनयान मिशन में तीन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजने की परिकल्पना की गई है, जिसके लिए एक अंतरिक्ष यान के विकास की आवश्यकता है जो चालक दल को अंतरिक्ष में ले जा सके और सुरक्षित रूप से जमीन पर वापस ला सके। इसरो के अनुसार इस लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) ने 8 अगस्त से 8 अगस्त के बीच चंडीगढ़ शहर में टर्मिनल बैलिस्टिक अनुसंधान प्रयोगशाला में रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज (आरटीआरएस) सुविधा में ड्रग पैराशूट तैनाती परीक्षण आयोजित किए।
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ड्रग पैराशूट मोर्टार-तैनात शंक्वाकार रिबन-प्रकार के पैराशूट हैं जिनका व्यास 19 फीट (5.8 मीटर) है। ये गगनयान क्रू मॉड्यूल को सुरक्षित रूप से जमीन पर वापस लाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो अंतरिक्ष यान को स्थिर करने और पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश के दौरान इसके वेग को कम करने में मदद करते हैं। परीक्षणों के तुरंत बाद इसरो द्वारा जारी किया गया वीडियो रॉकेट-संचालित रेल ट्रैक स्लेज पर उच्च वेग से यात्रा करते समय एक ड्रग शूट की सफल तैनाती को दर्शाता है।

यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो सितंबर के अंत या अक्टूबर की शुरुआत में परीक्षण वाहन प्रदर्शन 1 (टीवी-डी1) पर उच्च ऊंचाई वाले परीक्षण के दौरान ड्रग च्यूट का परीक्षण किया जाएगा। इसरो के अनुसार, गगनयान क्रू मॉड्यूल को 10 पैराशूट की एक जटिल प्रणाली द्वारा धीमा किया जाएगा। ये दो शीर्ष कवर पृथक्करण पैराशूट हैं, इसके बाद मॉड्यूल को स्थिर करने के लिए ड्रग पैराशूट की एक जोड़ी होती है। सुरक्षित लैंडिंग के लिए मॉड्यूल तैयार करने के लिए तीन पायलट शूट प्रत्येक तीन मुख्य पैराशूट निकालेंगे।

इस साल की शुरुआत में इसरो ने एक बंद पूल से मॉक क्रू मॉड्यूल को पुनर्प्राप्त करने के लिए भारतीय नौसेना के साथ मिलकर पुनर्प्राप्ति परीक्षण आयोजित किए थे। आगे के प्रमुख कदमों में इसरो को कम पृथ्वी की कक्षा में गगनयान की तकनीक का परीक्षण और सत्यापन करने के लिए मानवरहित उड़ानों की एक जोड़ी का संचालन करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि संशोधित लॉन्च वाहन मार्क -3 रॉकेट सुरक्षित रूप से मनुष्यों को कक्षा में ले जा सके। ये 2023 के अंत और 2024 की पहली छमाही में होने वाले हैं।
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पहली चालक दल वाली गगनयान की उड़ान 2024 के अंत में लॉन्च हो सकती है। यह तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को एक छोटी कक्षीय परीक्षण उड़ान पर ले जाएगी। वर्तमान में, केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के पास ही लोगों को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता है।


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