हिंदू धर्म में माघ महीने का खास महत्व होता है। इस महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस साल 29 जनवरी यानी आज पूरे देशभर में बसंत पंचमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दिन पूरे विधि-विधान से विद्या की देवी सरस्वती का पूजन किया जाता है। कहा जाता है कि इसी दिन से वसंत ऋतु का भी आरंभ हो जाता है। उत्तर भारत के कई राज्यों में बसंत पंचमी को श्री पंचमी , वसंत पंचमी और सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है।

बसंत पंचमी का दिन बहुत शुभ होता है इस दिन किसी भी शुभ काम की शुरूआत बिना किसी मुहूर्त देखे की जा सकती है। बता दें कि बसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा पीले कपड़े पहनकर की जाती है इसके साथ ही मां सरस्वती को हल्दी भी चढ़ाई जाती है। साथ ही पीला रंग इस बात की ओर इशारा करता है कि फसल पकने वाली है। वैसे पीले रंग को समृद्घि का सूचक भी माना गया है।

हिंदू मान्यताओं के मुताबिक बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था इस वजह से इस दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। वहीं मां सरस्वती को ज्ञान,कला और संगीत की देवी भी कहा जाता है। बसंत पंचमी पर पीले रंग का खास महत्व होता है।

स्कूलों,शिक्षण संस्थानों के साथ सभी मंदिरों में मां सरस्वती की प्रतिमा को पीले रंग के वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाता है। मां सरस्वती की पूजा करने वाले भक्त भी इस खास दिन पर पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं।

बसंत पंचमी के दिन पीला रंग पहनना बहुत शुभ माना जाता है। इसके पीछे के दो मुख्य कारण यह भी माने जाते हैं कि बसंत को ऋतुओं का माना जाता है और बसंत पंचमी के दिन से कड़कड़ाती ठंड खत्म होकर मौसम सुहावना हो जाता है। चारों ओर पेड़-पौधों पर नई पत्तियां,फूल-कलियां खिलने लग जाती है। गांव में इस तरह के मौसम में सरसों की फसल की वजह से धरती पीली दिखाई देती है। इसी पीली धरती को ध्यान में रखकर लोग बसंत पंचमी का स्वागत पीले रंग के कपड़े पहनकर करते हैं।

वहीं दूसरी ओर यह भी कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन सूर्य उत्तरायण होता है। जिसकी पीले किरणें इस बात की ओर इशारा करती है कि सूर्यकी तरह गंभीर और प्रखर बनना चाहिए।

इस वजह से बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का विशेष महत्व बताया गया है। इसी वजह से पंसद बसंत पंचमी के दिन पीला प्रसाद और खाना भी पीले रंग का बनता है।


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