65 वर्षीय इस डाकिए ने 30 सालों तक रोजाना 15 किमी पहाड़ की चढ़ाई करके लोगों तक पहुंचाए खत, लोगों ने कहा-रियल हीरो

Summary :

सोशल मीडिया पर तमिलनाडु के डी.सिवन की कहानी जमकर सुर्खियां बटोर रही हैं। 65 साल के डी.सिवन पोस्टमैन थे और पिछले हफ्ते ही वह रिटायर्ड हुए हैं।

सोशल मीडिया पर तमिलनाडु के डी.सिवन की कहानी जमकर सुर्खियां बटोर रही हैं। 65 साल के डी.सिवन पोस्टमैन थे और पिछले हफ्ते ही वह रिटायर्ड हुए हैं।इनकी कहानी जानने के बाद सरकार से सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें  पद्मश्री देने का अनुरोध किया है। 
बता दें कि डी.सीवन की तन्खा 12000 थी लेकिन वह पहाड़ी व जंगली रास्ता तय लगभग 15 किलोमीटर का करते थे और लोगों तक पत्र पहुंचाते थे। हालांकि कई जंगली जानवरों से उनका इस दौरान सामना होता था। उनके अंदर जज्बे को भी यह  मुश्किल रास्ते और खतरनाक जानवर भी कम नहीं कर पाए। 
इनकी कहानी दिल छू गई लोगों का 

ट्विटर पर डी.सिवन की एक तस्वीर आईएएस सुप्रिया साहू ने ट्वीट करते हुए पोस्ट में लिखा, पोस्टमैन डी. सिवन रोजाना 15 किलोमीटर चलकर कुनूर के घने जंगलों में हाथी, भालू जैसे जानवरों का सामना करते हुए लोगों तक उनके पत्र पुहंचाते थे। वो फिसलन भरे रास्तों, झरनों और सुरंगों को भी पार करते। 30 वर्षों से वह इसी तरह से काम कर रहे थे। हालांकि, बीते हफ्ते वो रिटायर हो गए। खबर लिखे जाने तक इस ट्वीट को  62 हजार से अधिक लाइक्स और 12 हजार से ज्यादा बार  री-ट्वीट किया गया। 
मिलना चाहिए पद्मश्री तो….. 

इस ट्वीट पर एक यूजर ने कमेंट करते हुए कहा, मैंने साल 2018 में इनका इंटरव्यू किया था। यह भारत रत्न के हकदार हैं। कम से कम इन्हें पद्मश्री पुरस्कार से तो नवाजा ही जाना चाहिए। हालांकि कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पोस्टमैन डी. सिवन को पद्मश्री देने की गुजारिश की और राष्ट्रपति को टैग किया। 
यूजर्स ने ऐसे रिएक्शंस ट्विटर पर दिए 

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क्यों नहीं इन्हें पद्मश्री?

तमिलनाडु से डी. सिवन हैं और वह एक साधारण डाकिए हैं जिन्होंने अपनी नौकरी ईमानदारी से की है। दरअसल एक आम डाकिए की तुलना में उनका काम बहुत ही चुनौतीपूर्ण था और वह चिट्ठियां कुनूर की नीलगिरी में जंगलों में पहाड़ी इलाकों के लोगों तक पहुंचाते थे।

Desk Team