पायलट क्लिनिकल ट्रायल में शोधकर्ताओं ने मैटर्नल स्पिंडल ट्रांसफर एमसएटी तकनीक का उपयोग करके तीन माता-पिता के बच्चे के साथ दुनिया की पहली गर्भावस्था हासिल की है। बता दें कि ये बांझपन की परेशानी को हल करने के लिए भविष्य में नए विस्तरों को खोल सकता है। एक ग्रीक महिला जिनकी उम्र 32 साल है वह अब तीन लोगों के डीएनए वाले बच्चे को जन्म देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने बांझपन की पेरशानी के इलाज के लिए मैटर्नल स्पिंडल ट्रांसफर तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पहले ज्ञात नैदानिक परीक्षण में हिस्सा लिया है। महिला ने पहले ही एंडोमेट्रियोसिस की वजह से दो ऑपरेशन किए थे।
इस तकनीक के जरिए रोगी के अनफर्टिलाइज्ड एग से मेयोटि स्पिंडल निकाला जाता है। इसे एक स्वस्थ डॉनर के ओवम में रखा जाता है। माइटोकॉन्ड्रिया से मूल नाभिक पहले ही हटा दिया जाता है। लस्ट में परिणामी ओकटी पुरुष साथी के शुक्राणु के साथ निषेचित होता है। इस अध्ययन में 40 साल से कम उम्र की 25 महिलओं को शामिल किया गया है। जो नैदानिक परीक्षण सूची के मुताबिक करीब दो पिछले असफल आईवीएफ कोशिशो को कर चुकी हैं और स्पेनिश केंद्र एम्ब्रायोटूल के वैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा है।
कुछ एक्सपर्ट का कहना है कि बच्चे के डीएनए का 99प्रतिशत से अधिक हिस्सा उसकी जैविक मां और पिता से आएगा भले ही वह एक डोनर से ही क्यों ना आया हो। चाहे एक पुरुष और दो अलग-अलग महिलाओं से युग्मकों की आवश्यकता होती है। लेकिन भविष्य में बच्चे की विशाल बहुमत के लिए जिम्मेदार परमाणु या जीनोमिक डीएनए जैविक माता और पिता से आएगा जैसे एक सामान्य निषेचन प्रक्रिया। वैसे डोनर सिर्फ माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए प्रदान करेगा जो सिर्फ 37 जीन को कोड करता है और 1 प्रतिशत से कम मानव डीएनए का प्रतिनिधित्व करता है।
उन्होंने बताया कि डोनर द्वारा प्रदान किया गया यह माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए भविष्य में होने वाली पीढिय़ों तक प्रसारित नहीं होगा यदि बेबी लड़का है क्योंकि माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए सिर्फ मातृ रूप से प्रसारित होता है। इसलिए ये रोगाणु को प्रभावित करने के लिए नहीं माना जाता है।
बता दें कि इस तकनीक से पैदा हुआ पहला बेबी 2016 में मैक्सिको में हुआ था। बाद में एक और ऐसे बच्चे का जन्म कीव में हुआ था। हालांकि यूनाइटेड किंगडम माइटोकॉन्ड्रियल बीमारियों के इलाज के लिए एमएसटी के नैदानिक उपयोग को मंजूरी देने वाला पहला देश बन गया है। इसका मतलब ये था कि माता-पिता को एक आनुवंशिक उत्परिवर्तन पर पारित किए बिना एक बच्चा होने की अनुमति देना था जो बच्चे में एक गंभीर माइटोकॉन्ड्रियल बीमारीका कारण बन सकता है।
कुछ इस तरीके से दिया तिहरी डीएनए तकनीक को अंजाम
डॉक्टरों की टीम ने एक बांझ मां के अंडे को और पिता का वीर्य और एक अन्य महिला का अंडा लेकर गर्भ धारण कराया जिसके बाद एक लड़का पैदा हुआ है। मेडिकल टीम की और से बताया गय कि इस प्रक्रिया में मां के अंडे के क्रोमोसोम के जेनेटिक तत्वों को डोनर महिला के अंडे में ट्रांसफर किया गया जिसकी अपनी जेनेटिक सामग्री को पहले ही हटा दिया गया था।
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