सोल, 19 अगस्त (आईएएनएस)। कोरियाई महाद्वीप को लेकर अमेरिका के रवैए में जबरदस्त बदलाव आया है। नॉर्थ कोरिया से बातचीत की कोशिशों के बीच अमेरिका और दक्षिण कोरिया का वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ इस बार निर्धारित समय से छह दिन पहले समाप्त होगा। दक्षिण कोरिया ने बुधवार को कहा कि अमेरिका के अनुरोध पर अभ्यास अब 21 अगस्त को खत्म किया जाएगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने के प्रयास कर रहे हैं। ट्रंप ने हाल में अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि ये महंगे हैं और उत्तर कोरिया के साथ संबंध सुधारने की उनकी कोशिशों के लिहाज से जरूरी नहीं हैं।
योनहाप ने बताया कि दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अनुसार, इस साल का अभ्यास करीब 11 दिनों के लिए निर्धारित था। इसमें दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी सैनिकों के साथ संयुक्त राष्ट्र कमान से जुड़े सैन्यकर्मी भी शामिल हुए। अभ्यास का उद्देश्य उत्तर कोरिया के संभावित हमले की स्थिति में दोनों देशों की संयुक्त सैन्य तैयारी और कमान क्षमताओं को मजबूत करना है।
अभ्यास को छह दिन पहले खत्म करने का फैसला सोल के लिए भी अचानक आया। दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून ने कहा कि उन्हें अमेरिका के इस फैसले की अग्रिम जानकारी नहीं थी। इससे दोनों सहयोगी देशों के बीच सैन्य समन्वय को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
ट्रंप और किम के बीच 2018 और 2019 में ऐतिहासिक शिखर वार्ताएं हुई थीं। हालांकि, 2019 में हनोई में हुई दूसरी बैठक उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे प्रतिबंधों को लेकर मतभेद के कारण बिना किसी समझौते के खत्म हो गई थी।
अब ट्रंप प्रशासन एक बार फिर किम के साथ संवाद की संभावनाएं तलाश रहा है। ऐसे में सैन्य अभ्यास को समय से पहले समाप्त करने को उत्तर कोरिया के साथ तनाव कम करने की दिशा में एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, दक्षिण कोरिया में इसे लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल और उत्तर कोरिया के खिलाफ प्रतिरोध क्षमता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उत्तर कोरिया की रूस के साथ बढ़ती सैन्य साझेदारी के बीच संयुक्त अभ्यास में कटौती का फैसला और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सोल के सामने अब चुनौती यह है कि वह ट्रंप की उत्तर कोरिया के साथ कूटनीतिक पहल का समर्थन करते हुए अपनी सुरक्षा और अमेरिका के साथ सैन्य गठबंधन की विश्वसनीयता भी बनाए रखे।
–आईएएनएस
केआर/
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