मिस्र, सूडान, इरिट्रिया और सोमालिया के नेताओं ने जारी किया साझा घोषणापत्र, संप्रभुता और जल अधिकारों पर दिया जोर

Summary :

काहिरा, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। मिस्र, सूडान, इरिट्रिया और सोमालिया के नेताओं ने देश की संप्रभुता, लाल सागर के मैनेजमेंट और जल अधिकारों को लेकर एक साझा घोषणापत्र जारी किया है। चारों देशों ने क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना जरूरी बताया है। रविवार को मिस्र के न्यू अलामीन में चार देशों के नेताओं की बैठक के बाद ‘अल अलामीन संयुक्त घोषणापत्र’ जारी किया गया। इसमें नेताओं ने ‘किसी भी बहाने’ क्षेत्र के देशों के अंदरूनी मामलों में बाहरी दखल का विरोध किया। स‍िन्हुआ न्यूज एजेंसी की र‍िपोर्ट के अनुसार, बैठक में मिस्र के राष्ट्रपति…

काहिरा, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। मिस्र, सूडान, इरिट्रिया और सोमालिया के नेताओं ने देश की संप्रभुता, लाल सागर के मैनेजमेंट और जल अधिकारों को लेकर एक साझा घोषणापत्र जारी किया है। चारों देशों ने क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना जरूरी बताया है।

रविवार को मिस्र के न्यू अलामीन में चार देशों के नेताओं की बैठक के बाद ‘अल अलामीन संयुक्त घोषणापत्र’ जारी किया गया। इसमें नेताओं ने ‘किसी भी बहाने’ क्षेत्र के देशों के अंदरूनी मामलों में बाहरी दखल का विरोध किया।

स‍िन्हुआ न्यूज एजेंसी की र‍िपोर्ट के अनुसार, बैठक में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इरिट्रिया के राष्ट्रपति इसायस अफवर्की, सोमालिया के राष्ट्रपति हसन शेख मोहम्मद और सूडान की ट्रांजिशनल सॉवरेन काउंसिल के अध्यक्ष अब्देल फतह अल-बुरहान शामिल हुए। स‍िन्हुआ न्यूज एजेंसी ने इसकी जानकारी दी।

बैठक के दौरान चारों नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर चर्चा की। इसके साथ ही चारों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी बातचीत हुई। कई क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

सूडान के मुद्दे पर चारों नेताओं ने देश की एकता, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संस्थानों के समर्थन की बात कही। साथ ही सूडान में किसी भी समानांतर व्यवस्था या संस्था बनाने का विरोध किया।

नेताओं ने तथाकथित ‘सोमालीलैंड’ को किसी भी तरह की मान्यता या समर्थन देने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि लाल सागर से जुड़े मामलों का मैनेजमेंट सिर्फ उसके तट पर बसे देशों की जिम्मेदारी है। घोषणापत्र में नील नदी समेत एक से ज्यादा देशों से होकर गुजरने वाली नदियों के मामले में अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने पर भी जोर दिया गया।

नेताओं ने खास तौर पर इस सिद्धांत पर जोर दिया कि किसी देश के कदम से दूसरे देश को नुकसान नहीं होना चाहिए। साथ ही ऐसे मामलों में पहले से जानकारी देने, बातचीत करने और आपसी सहमति के जरिए सहयोग करने की जरूरत बताई गई।

चारों नेताओं ने ‘ऐसे किसी भी एकतरफा कदम’ का पूरी तरह विरोध किया, जिससे नील नदी के निचले हिस्से में बसे दोनों देशों के मौजूदा जल इस्तेमाल को नुकसान पहुंचे। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब मिस्र क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को लेकर हॉर्न ऑफ अफ्रीका और लाल सागर क्षेत्र के देशों के साथ अपना तालमेल बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रहा है।

–आईएएनएस

एवाई/एएस

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

IANS Agency

The Indo-Asian News Service (IANS) is a private news agency providing round-the-clock, in-depth coverage of politics, business, entertainment, and world affairs from India and South Asia.