भारत-डेनमार्क ने शुरू किया पहला समुद्री सुरक्षा संवाद, सहयोग बढ़ाने पर जोर

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कोपेनहेगन, 19 जून (आईएएनएस)। भारत के एक प्रतिनिधिमंडल ने डेनमार्क के स्टेट सेक्रेटरी और समुद्री सुरक्षा दूत से मुलाकात कर वैश्विक सुरक्षा माहौल, खासकर समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। यह जानकारी शुक्रवार को डेनमार्क स्थित भारतीय दूतावास ने दी। भारतीय दूतावास ने ‘एक्‍स’ पर लिखा, “भारत और डेनमार्क के बीच पहला ‘मैरीटाइम सिक्योरिटी डायलॉग’ इस सप्ताह आयोजित किया गया।” दूतावास ने बताया, “विदेश मंत्रालय (एमईए) के डी एंड आईएसए डिवीजन की संयुक्त सचिव सुभाषिनी नारायणन के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल (जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) के प्रतिनिधि भी शामिल थे) ने भारत के राजदूत मनीष प्रभात…

कोपेनहेगन, 19 जून (आईएएनएस)। भारत के एक प्रतिनिधिमंडल ने डेनमार्क के स्टेट सेक्रेटरी और समुद्री सुरक्षा दूत से मुलाकात कर वैश्विक सुरक्षा माहौल, खासकर समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। यह जानकारी शुक्रवार को डेनमार्क स्थित भारतीय दूतावास ने दी।

भारतीय दूतावास ने ‘एक्‍स’ पर लिखा, “भारत और डेनमार्क के बीच पहला ‘मैरीटाइम सिक्योरिटी डायलॉग’ इस सप्ताह आयोजित किया गया।”

दूतावास ने बताया, “विदेश मंत्रालय (एमईए) के डी एंड आईएसए डिवीजन की संयुक्त सचिव सुभाषिनी नारायणन के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल (जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) के प्रतिनिधि भी शामिल थे) ने भारत के राजदूत मनीष प्रभात के साथ डेनमार्क की स्टेट सेक्रेटरी लोटे माचोन, समुद्री सुरक्षा दूत निकोलाई रूगे और डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की।”

दूतावास के अनुसार, दोनों पक्षों ने वैश्विक सुरक्षा स्थिति, विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की और आपसी सहयोग को और मजबूत बनाने की संभावनाओं पर विचार किया।

डेनमार्क के भारत में राजदूत रासमुस अबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन ने गुरुवार को ‘एक्स’ पर लिखा, “समुद्री सुरक्षा भारत और डेनमार्क दोनों के लिए बढ़ती चिंता का विषय है। इसी वजह से इस सप्ताह कोपेनहेगन में दोनों देशों के बीच पहला समुद्री सुरक्षा संवाद आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत समुद्री क्षेत्र में काम करने वाली डेनिश रक्षा कंपनियों के साथ एक कार्यकारी लंच भी रखा गया है।”

मई में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उस समय की कार्यवाहक डेनिश प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन, नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो, आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रुन मजोल फ्रॉस्टाडॉटिर और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने एक संयुक्त बयान जारी किया था। इसमें समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई गई थी।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों, खासकर संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के अनुरूप एक स्वतंत्र, खुला, शांतिपूर्ण और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

इस दिशा में उन्होंने द्विपक्षीय संवादों, इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (आईपीओआई) और ‘महासागर’ (म्‍यूट्यूअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्‍योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजंस) के विजन के तहत मिलकर काम करने की बात कही।

विदेश मंत्रालय ने कहा, “नेताओं ने अवैध समुद्री गतिविधियों (आईएमए) से पैदा हो रही चुनौतियों से निपटने पर भी चर्चा की। इनमें समुद्री डकैती, तस्करी, अवैध और अनियमित मछली पकड़ना, समुद्री प्रदूषण और नाविकों की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।”

मंत्रालय ने आगे कहा, “नॉर्वे और डेनमार्क के साथ समुद्री सुरक्षा संवाद शुरू किए जाने का स्वागत किया गया। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहतर सूचना साझा करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने की जरूरत है।”

–आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

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