नई दिल्ली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने पोलैंड की राजधानी वारसॉ में प्रमुख उद्योग जगत के नेताओं के साथ कई उच्चस्तरीय बैठकें कर रक्षा, अंतरिक्ष, सूचना प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत-पोलैंड सहयोग को मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए मंत्री ने कहा कि उन्होंने पोलैंड की अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर निवेश, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), तकनीकी साझेदारी और औद्योगिक सहयोग के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया।
रक्षा एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख पोलिश कंपनी डब्ल्यूबी ग्रुप के दौरे के दौरान जितिन प्रसाद ने कंपनी के अध्यक्ष पिओटर वोज्चेखोव्स्की से मुलाकात की। बैठक में अगली पीढ़ी की रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएवी), उन्नत संचार तकनीकों, स्वायत्त प्रणालियों और सामरिक इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
मंत्री ने वैश्विक आईटी और क्लाउड सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी बिलेनियम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) गावेल लोपिंस्की से भी मुलाकात की। बिलेनियम की भारत के पुणे में पहले से मौजूदगी है। दोनों पक्षों ने भारत के डिजिटल टैलेंट इकोसिस्टम, क्लाउड ट्रांसफॉर्मेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आईटी क्षेत्र में नए निवेश एवं सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।
अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को लेकर जितिन प्रसाद ने पोलैंड की स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी क्रियोटेक इंस्ट्रूमेंट्स के सह-संस्थापक डॉ. ग्रेजेगोरज ब्रॉना और उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी ग्रेजेगोर्ज व्रोचना से मुलाकात की। बातचीत के दौरान माइक्रो-सैटेलाइट्स, अंतरिक्ष हार्डवेयर, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और क्वांटम प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ भारत के तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और निवेश के अवसरों पर विचार किया गया।
इसके अलावा, मंत्री ने बोरिस्जेव ग्रुप के बोर्ड सदस्य एडम होलेवा और मैफ्लो और बीएपी ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) से वारसॉ स्थित भारतीय दूतावास में मुलाकात की। इस दौरान तकनीकी सहयोग, संयुक्त उद्यमों (ज्वाइंट वेंचर) और नए निवेश अवसरों पर चर्चा हुई।
जितिन प्रसाद ने कहा कि वार्ता में भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं के तहत निवेश संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही भारत और पोलैंड के बीच औद्योगिक साझेदारी को मजबूत कर वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक सक्षम बनाने के उपायों पर भी विचार किया गया।
ये बैठकें ऐसे समय में हुई हैं जब दोनों देश रणनीतिक क्षेत्रों में आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने तथा व्यवसायों के बीच आपसी जुड़ाव को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
–आईएएनएस
डीबीपी
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