लोकतंत्र के मामले में तुर्की जिस रास्ते पर है, वहां से वापसी संभव नहीं; अमेरिकी लॉमेकर्स ने दी चेतावनी

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वॉशिंगटन, 6 जून (आईएएनएस)। अमेरिका के वरिष्ठ लॉमेकर्स और नीति विशेषज्ञों ने कड़ी चेतावनी दी है कि तुर्की लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था से लगातार दूर होता जा रहा है। अगले महीने अंकारा में होने वाले अहम नाटो शिखर सम्मेलन से पहले राजनीतिक दमन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। टॉम लैंटोस मानवाधिकार आयोग की सुनवाई में, दोनों पार्टियों के लॉमेकर्स ने सवाल उठाया कि क्या राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की सरकार सार्थक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की अनुमति देगी, क्योंकि आलोचकों ने विरोधियों, पत्रकारों और नागरिक समाज पर बढ़ती कार्रवाई का जिक्र किया। आयोग के…

वॉशिंगटन, 6 जून (आईएएनएस)। अमेरिका के वरिष्ठ लॉमेकर्स और नीति विशेषज्ञों ने कड़ी चेतावनी दी है कि तुर्की लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था से लगातार दूर होता जा रहा है। अगले महीने अंकारा में होने वाले अहम नाटो शिखर सम्मेलन से पहले राजनीतिक दमन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

टॉम लैंटोस मानवाधिकार आयोग की सुनवाई में, दोनों पार्टियों के लॉमेकर्स ने सवाल उठाया कि क्या राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की सरकार सार्थक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की अनुमति देगी, क्योंकि आलोचकों ने विरोधियों, पत्रकारों और नागरिक समाज पर बढ़ती कार्रवाई का जिक्र किया।

आयोग के सह-अध्यक्ष प्रतिनिधि क्रिस्टोफर स्मिथ ने कहा, “आज की सुनवाई का शीर्षक एक बहुत महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। क्या तुर्की आजादी की राह खोज सकता है?”

स्मिथ ने तर्क दिया कि तुर्की में लोकतांत्रिक संस्थाएं इतनी कमजोर हो गई हैं कि “नागरिक और राजनीतिक आजादी के सबसे बुनियादी पहलुओं, जैसे कानून का शासन, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानवाधिकारों का सम्मान, को बहाल करना बहुत मुश्किल होगा।”

उन्होंने इस्तांबुल के मेयर एक्रेम इमामोग्लू की मार्च 2025 में हुई गिरफ्तारी की ओर इशारा किया, जिन्हें एर्दोगन का सबसे मजबूत राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना जाता है, और इसे एक अहम मोड़ बताया।

स्मिथ ने कहा, “मार्च 2025 में उनकी गिरफ्तारी ठीक उसी दिन हुई जब उनकी पार्टी उन्हें अगले राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित करने वाली थी।”

आयोग के सह-अध्यक्ष प्रतिनिधि जेम्स मैकगवर्न ने कहा कि तुर्की की पिछली कांग्रेसी समीक्षाओं के बाद से स्थिति और खराब हो गई है।

मैकगवर्न ने कहा, “मुझे लगता है कि हालात और बिगड़ रहे हैं।” उन्होंने मानवाधिकार संगठनों की उन रिपोर्टों का हवाला दिया जिनमें विपक्षी समूहों और पत्रकारों पर दबाव का जिक्र किया गया था।

कई गवाहों ने बताया कि तुर्की उस स्थिति से आगे बढ़ रहा है जिसे राजनीतिक वैज्ञानिक ‘प्रतिस्पर्धी अधिनायकवाद’ कहते हैं और एक ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है जहां चुनावों से शायद ही कोई राजनीतिक बदलाव हो सके।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के स्कॉलर एंड्रयू ओ’डोनोह्यू ने प्रतिनिधियों को बताया कि तुर्की एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा, “तुर्की आज एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा है। तुर्की ‘प्रतिस्पर्धी अधिनायकवाद’, एक ऐसी व्यवस्था जिसमें चुनाव निष्पक्ष नहीं होते लेकिन विपक्ष फिर भी जीत सकता है, से ‘पूर्ण अधिनायकवाद’ की ओर बढ़ रहा है, एक ऐसी व्यवस्था जिसमें विपक्ष मतपेटी के जरिए सत्ता हासिल नहीं कर सकता।”

ओ’डोनोह्यू ने कहा कि इमामोग्लू की जेल और मुख्य विपक्षी रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई ने इस बात पर संदेह पैदा कर दिया है कि क्या मतदाता चुनावों के जरिए नए नेता चुन पाएंगे।

काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के एडजंक्ट सीनियर फेलो हेनरी बार्की ने तर्क दिया कि सत्ता तेजी से एर्दोगन के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गई है। उन्होंने कहा, “पिछले दशक में जो स्थिति सामने आई है, वह सिर्फ सैद्धांतिक तौर पर लोकतंत्र के कमजोर होने की बात नहीं है, बल्कि यह एक व्यक्ति के शासन की व्यवस्था है, एक ऐसा शासन जो तेजी से एक ही व्यक्ति के राजनीतिक अस्तित्व, संस्थागत अधिकारों और व्यक्तिगत पसंद के इर्द-गिर्द केंद्रित होता जा रहा है।”

पूर्व राजनीतिक कैदी और अमेरिकी नागरिक सेरकान गोल्गे ने आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत आरोप लगने के बाद तुर्की की जेलों में बिताए लगभग तीन साल के अपने अनुभव के बारे में भावुक बयान दिया।

गोल्गे ने लॉमेकर्स से कहा, “मैं जेल से तो बच निकला, लेकिन जिंदा बच जाना ही न्याय नहीं है।”

अपने परिवार पर पड़े असर का जिक्र करते हुए, उन्होंने जेल से रिहाई के बाद बॉर्डर पर हुई जांच के दौरान अपने बेटे की गुहार को याद किया कि “नहीं डैड, फिर से नहीं, फिर से नहीं।”

गोल्गे ने तर्क दिया कि तुर्की के आतंकवाद-रोधी कानूनों का इस्तेमाल कानूनी कामों को अपराध की श्रेणी में लाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने वाशिंगटन से अपील की कि वह अंकारा पर ‘यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स’ के फैसलों का पालन करने के लिए दबाव डाले।

इस सुनवाई में जुलाई में अंकारा में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन पर भी चर्चा हुई। गवाहों ने ट्रंप प्रशासन से आग्रह किया कि वे मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को सीधे एर्दोगन के सामने उठाएं।

ओ’डोनोह्यू ने कहा, “तुर्की सरकार अमेरिका के साथ सहयोग करना चाहती है। एक लोकतंत्र के तौर पर हमारे पास यह क्षमता है कि हम इस द्विपक्षीय सहयोग को इस शर्त से जोड़ें कि तुर्की सरकार मानवाधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा की दिशा में ज्यादा कदम उठाए।”

–आईएएनएस

एससीएच/एएस

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