इबोला संकट: क्वारंटीन व्यवस्था के लिए केन्या के साथ समझौते की उम्मीद जता रहा अमेरिका

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वॉशिंगटन, 3 जून (आईएएनएस)। ट्रंप प्रशासन केन्या और अन्य अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर अफ्रीका में इबोला प्रभावित इलाकों के पास ही इलाज और क्वारंटाइन (लोगों को अलग रखने) की व्यवस्था बनाए रखने पर काम कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जिन अमेरिकियों को संक्रमण का खतरा है, उन्हें सीधे अमेरिका लाने के बजाय वहीं रहकर उपचार कराना बेहतर है। व्हाइट हाउस में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मेडिकेयर और मेडिकेड सर्विसेज के प्रशासक डॉ. मेहमत ओज ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता यह है कि इलाज की सुविधाएं प्रकोप वाले क्षेत्र के जितना करीब हो सके,…

वॉशिंगटन, 3 जून (आईएएनएस)। ट्रंप प्रशासन केन्या और अन्य अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर अफ्रीका में इबोला प्रभावित इलाकों के पास ही इलाज और क्वारंटाइन (लोगों को अलग रखने) की व्यवस्था बनाए रखने पर काम कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जिन अमेरिकियों को संक्रमण का खतरा है, उन्हें सीधे अमेरिका लाने के बजाय वहीं रहकर उपचार कराना बेहतर है।

व्हाइट हाउस में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मेडिकेयर और मेडिकेड सर्विसेज के प्रशासक डॉ. मेहमत ओज ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता यह है कि इलाज की सुविधाएं प्रकोप वाले क्षेत्र के जितना करीब हो सके, उतनी करीब हों। इससे मरीजों को जल्दी इलाज मिल सकेगा और लंबी दूरी तक उन्हें ले जाने के जोखिम भी कम होंगे।

ओज ने कहा, “अगर कोई मरीज बीमार है, तो एक हृदय रोग विशेषज्ञ के तौर पर मैं चाहूंगा कि उसे उसी अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर मिले जो उसके कमरे के बिल्कुल पास हो।”

उन्होंने कहा क‍ि उन्हें दुनिया के दूसरे छोर पर भेजना, खासकर जब हमें पूरी तरह पता न हो कि उनकी स्थिति क्या है, शायद सबसे समझदारी भरा फैसला नहीं होगा।

यह टिप्पणी उस सवाल के जवाब में आई कि अगर केन्या इस केंद्र की मेजबानी करने से मना कर देता है, तो इबोला के संपर्क में आए अमेरिकी सहायता कर्मियों या अन्य लोगों का इलाज कहां होगा।

ओज ने भरोसा जताया कि विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में चल रही कूटनीतिक बातचीत का कोई न कोई समाधान निकल आएगा।

उन्होंने कहा क‍ि हमें पूरा विश्वास है कि विदेश मंत्रालय इस मामले पर गंभीरता से काम कर रहा है और केन्या के साथ कोई व्यवस्था तय हो जाएगी।

केन्या को ‘एक खूबसूरत देश’ और ‘बहुत सक्षम लोगों वाला देश’ बताते हुए ओज ने कहा कि उन्हें लगता है कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंच जाएंगे।

उन्होंने कहा क‍ि मुझे लगता है कि यह एक बेहतरीन समाधान है।

सीएमएस प्रशासक ने यह भी बताया कि अगर केन्या के साथ यह व्यवस्था नहीं बन पाती, तो अमेरिका के पास दूसरे विकल्प भी मौजूद हैं।

उन्होंने कहा क‍ि कुछ और देश भी हमारी मदद के लिए तैयार हो सकते हैं, और हमारे जर्मन सहयोगी भी हैं। इसलिए हमारे पास कई जगहें हैं जहां हम लोगों को भेज सकते हैं।

इबोला के खिलाफ प्रशासन की व्यापक रणनीति में इलाज केंद्रों को समर्थन देना और अमेरिका आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की अतिरिक्त जांच करना भी शामिल है।

ओज ने बताया कि नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ के निदेशक डॉ. जय भट्टाचार्य, जो इस संघीय प्रतिक्रिया प्रयास की निगरानी भी कर रहे हैं, व्हाइट हाउस के अधिकारियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद से तैयारियों का समन्वय कर रहे हैं।

उन्होंने कहा क‍ि उन्हें डॉ. हेइडी ओवरटन और व्हाइट हाउस के कई अन्य लोगों का सहयोग मिल रहा है, इसलिए पूरी योजना अच्छी तरह तैयार की गई है।

ओज के अनुसार, अमेरिकी सरकार प्रभावित क्षेत्रों में इलाज के प्रयासों के लिए आर्थिक सहायता दे रही है और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर अतिरिक्त जांच व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं।

उन्होंने कहा क‍ि हमने जानबूझकर प्रमुख हवाई अड्डों पर जांच और परीक्षण की ऐसी व्यवस्थाएं लगाई हैं जहां से लोग यात्रा करके आ सकते हैं।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि अमेरिका जल्द ही कई बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करने वाला है, जिनमें दुनिया भर से बड़ी संख्या में लोग आने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा क‍ि मुझे लगता है कि विदेश मंत्री रूबियो के नेतृत्व में हम केन्या के साथ एक बहुत अच्छा समझौता कर लेंगे।

इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो रक्तस्रावी बुखार (हेमरेजिक फीवर) का कारण बन सकती है। अलग-अलग प्रकोपों और उपलब्ध इलाज के आधार पर इसकी मृत्यु दर लगभग 25 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक रही है। सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां आमतौर पर बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए संक्रमित या संदिग्ध लोगों को जल्दी अलग करना, जांच करना और इलाज शुरू करना सबसे महत्वपूर्ण मानती हैं।

–आईएएनएस

एवाई/एएस

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