भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 54.91 अरब डॉलर पहुंचा, टॉप घाटे वाले देशों की सूची में शामिल

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वाशिंगटन, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 महीनों में अमेरिका को भारत के साथ व्यापार में 54.91 अरब डॉलर का घाटा हुआ है। इस बड़े घाटे की वजह से भारत अब उन देशों में शामिल हो गया है जिनसे अमेरिका को सबसे ज्यादा व्यापारिक घाटा (नुकसान) होता है। वहीं, फरवरी के महीने में दुनिया भर के दूसरे देशों के साथ भी अमेरिका का कुल व्यापार घाटा और ज्यादा बढ़ा है। महीने के आंकड़ों से पता चला कि फरवरी में अमेरिका का व्यापार घाटा बढ़कर 57.35 बिलियन डॉलर हो गया, जो जनवरी से 2.67 बिलियन डॉलर ज्यादा है,…

वाशिंगटन, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 महीनों में अमेरिका को भारत के साथ व्यापार में 54.91 अरब डॉलर का घाटा हुआ है। इस बड़े घाटे की वजह से भारत अब उन देशों में शामिल हो गया है जिनसे अमेरिका को सबसे ज्यादा व्यापारिक घाटा (नुकसान) होता है। वहीं, फरवरी के महीने में दुनिया भर के दूसरे देशों के साथ भी अमेरिका का कुल व्यापार घाटा और ज्यादा बढ़ा है।

महीने के आंकड़ों से पता चला कि फरवरी में अमेरिका का व्यापार घाटा बढ़कर 57.35 बिलियन डॉलर हो गया, जो जनवरी से 2.67 बिलियन डॉलर ज्यादा है, हालांकि यह अभी भी 12 महीने के एवरेज से 11 फसदी कम है।

यह बढ़ोतरी इसलिए हुई क्योंकि इम्पोर्ट, एक्सपोर्ट से ज्यादा तेजी से बढ़ा। महीने के दौरान कुल एक्सपोर्ट 314.8 बिलियन डॉलर रहा, जबकि इम्पोर्ट 372.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

वस्तु व्यापार में अमेरिका को 84.60 अरब डॉलर का घाटा हुआ, जबकि सेवाओं के क्षेत्र में 27.26 अरब डॉलर का अधिशेष दर्ज किया गया। जनवरी की तुलना में वस्तु व्यापार घाटा बढ़ा, जबकि सेवाओं का अधिशेष घट गया।

भारत अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में बना रहा। केवल फरवरी में ही अमेरिका ने भारत के साथ लगभग 3.5 अरब डॉलर का वस्तु व्यापार घाटा दर्ज किया।

फरवरी 2026 तक 12 महीने के समय में, भारत का अमेरिका के कुल सामान व्यापार घाटा में लगभग 5.01 फीसदी हिस्सा था, जो दोनों देशों के बीच लगातार ट्रेड फ्लो को दिखाता है।

भारत अमेरिकी इंपोर्ट के बड़े सोर्स में भी शामिल था। इसी समय में भारत से कुल 101.97 बिलियन डॉलर का सामान इंपोर्ट हुआ, जो अमेरिकी मार्केट में फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स और दूसरे प्रोडक्ट्स की सप्लाई में इसकी भूमिका को दिखाता है।

वहीं, भारत से इंपोर्ट से अमेरिकी कस्टम ड्यूटी में 12.34 बिलियन डॉलर आए, जिसका एवरेज टैरिफ दर 12.12 फीसदी था।

अमेरिका के समग्र व्यापार परिदृश्य में मेक्सिको, वियतनाम और चीन के साथ बड़े असंतुलन देखने के लिए मिले, जो वस्तु व्यापार घाटे में सबसे अधिक योगदान देने वाले देश बने रहे।

फरवरी में एक्सपोर्ट बढ़ा, क्योंकि इंडस्ट्रियल सप्लाई और मटीरियल की शिपमेंट ज्यादा हुई, जिसमें नॉन-मॉनेटरी सोना और नैचुरल गैस शामिल हैं। सर्विसेज एक्सपोर्ट भी थोड़ा बढ़ा।

हालांकि, कैपिटल गुड्स, कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर, क्रूड ऑयल और फार्मास्यूटिकल तैयारियों की डिमांड की वजह से इंपोर्ट ज्यादा तेजी से बढ़ा।

पिछले साल ट्रेड किए गए सामानों में, सिविलियन एयरक्राफ्ट, फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट और नॉन-मॉनेटरी सोना अमेरिका के मुख्य एक्सपोर्ट थे। इंपोर्ट की बात करें तो, फार्मास्यूटिकल्स, कंप्यूटर और पैसेंजर गाड़ियों का दबदबा रहा।

महीने में बढ़ोतरी के बावजूद, लंबे समय के ट्रेंड से व्यापार असंतुलन में कुछ कमी दिख रही है। साल-दर-साल के डेटा से पता चला है कि पिछले साल इसी समय की तुलना में घाटा कम हुआ है, जिसमें एक्सपोर्ट बढ़ा है और इंपोर्ट सालाना आधार पर घटा है।

फरवरी में, अमेरिका ने इंपोर्ट ड्यूटी के तौर पर 21.24 बिलियन डॉलर इकट्ठा किए, जो 12 महीने के एवरेज से लगभग 13 फीसदी कम है। एवरेज लागू ड्यूटी रेट 8.48 फीसदी था।

–आईएएनएस

केके/एएस

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