तेहरान, 19 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका ने लगातार आठवीं रात ईरान पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। जिसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरानी आर्मी के अनुसार, उसने कुवैत स्थित दो अमेरिकी सैन्य अड्डों को ड्रोन से निशाना बनाया है। रविवार को ईरान के सरकारी प्रसारक आईएसएनए ने सेना की ओर से जारी किए गए बयान के हवाले से कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी हमलों के प्रतिशोध में की गई।
ईरानी सेना के अनुसार, उसने कामिकाजे ड्रोन के जरिए कैंप उदैरी स्थित अमेरिकी सेना के गोला-बारूद भंडार और अली अल सलेम एयर बेस पर तैनात पैट्रियट रडार सिस्टम और एयर सर्विलांस रडार को निशाना बनाया। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान या संभावित हताहतों के बारे में तत्काल कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस बीच, ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही, जो खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रमुख हैं, ने अमेरिका को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कोई और सैन्य कार्रवाई की, तो ईरानी सशस्त्र बल उसका “निर्णायक और विनाशकारी जवाब” देंगे।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अब्दुल्लाही ने कहा कि देश किसी भी आक्रामक कार्रवाई का पूरी ताकत से जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने अमेरिका को “ग्रेट सैटन (महाशैतान)” बताते हुए उन पर “विश्वासघाती और धोखेबाज दुश्मन” होने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सशस्त्र सेनाओं, सरकारी संस्थानों और आम जनता के बीच एकता को और मजबूत करेगा। साथ ही उन्होंने दावा किया कि भविष्य में ईरान अमेरिका को पिछले संघर्षों की तुलना में कहीं अधिक भारी कीमत चुकाने पर मजबूर करेगा।
इससे पहले, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बयान जारी कर पुष्टि की है कि उसने 18 जुलाई को ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों का एक और दौर पूरा किया। सेंटकॉम के अनुसार, यह लगातार आठवीं रात थी जब अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की।
अमेरिकी सेना ने बताया कि इस अभियान में ईरान की तटीय निगरानी प्रणालियों, वायु रक्षा ठिकानों, समुद्री सैन्य क्षमताओं और मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करना था।
सेंटकॉम ने यह भी कहा कि अमेरिकी सैन्य संसाधनों ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े उन बलों को भी निशाना बनाया, जिन पर 17 जुलाई को जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने का आरोप है।
अमेरिकी सेना के अनुसार, वर्तमान में मध्य पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। बयान में कहा गया कि सभी सैनिक पूरी तरह सतर्क हैं, अभियान के लिए तैयार हैं और क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने की क्षमता रखते हैं।
–आईएएनएस
केआर/
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