कांगो में इबोला वायरस से 3 महीनों में 2,000 से अधिक मौतें, भारत ने किया 1 करोड़ डौलर की मदद का एलान

Summary :

अफ्रीकी देश कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप भयावह रूप ले चुका है। महज तीन महीनों में 2,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए भारत ने 1 करोड़ डॉलर की सहायता का ऐलान किया है।

Ebola outbreak

Ebola outbreak : अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वायरस का भयानक रूप लेता जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, महज 3 महीने से भी कम समय में इस जानलेवा बीमारी से 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से आधी यानी करीब 1,000 मौतें बीते 20 दिनों के भीतर दर्ज की गई हैं।

पांच प्रांतों में अब तक कुल 4,381 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। कांगो में यह अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला आउटब्रेक (Outbreak) बन गया है, जो 2014-16 के वेस्ट अफ्रीका संकट के बाद दूसरा सबसे बड़ा प्रकोप है।

WHO राहत कार्यों में जुटी

Ebola outbreak

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यूएन (UN) के वरिष्ठ इबोला समन्वयक जूलियन हार्निस ने चिंता जताते हुए कहा कि यह समय पीड़ितों की मदद और वायरस के फैलाव को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का है।

ग्राउंड पर बिगड़ते हालात से निपटने के लिए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां तेजी से राहत कार्यों में जुटी हैं। रीता में स्थित डब्ल्यूएचओ के ट्रीटमेंट सेंटर में बेड की क्षमता 40 से बढ़ाकर 80 की जा रही है। इसके साथ ही स्थानीय मैटरनिटी वार्ड को 20 बेड दिए गए हैं, ताकि डिलीवरी सेवाएं प्रभावित न हों।

स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए डब्ल्यूएचओ ने 100 हाइजीनिस्ट, 100 सर्विलांस अधिकारी और सुरक्षित दफनाने (Burial) के लिए विशेष टीमों को ट्रेंड किया है। इस अभियान में यूनिसेफ, अलिमा, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम और मोनुस्को जैसी संस्थाएं लगातार जमीनी मदद पहुंचा रही हैं।

भारत की तरफ से मदद

Ebola outbreak

भारत ने भी संकट की इस घड़ी में मदद का हाथ बढ़ाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अफ्रीकी संघ के शिखर सम्मेलन में कांगो की मदद के लिए 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर (USD 10 million) की सहायता राशि का ऐलान किया था।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रकोप इबोला के बुंदीबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन के कारण फैला है, जिसके इलाज या रोकथाम के लिए फिलहाल कोई अनुमोदित वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में समय पर पहचान और मरीज का आइसोलेशन ही एकमात्र उपाय बचा है।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।