भारत ने निभाया दोस्ती का फर्ज, तेल की कमी से जूझ रहे रूस को भिजवाया 60,000 मीट्रिक टन पेट्रोल

Summary :

ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों ने रूस के भीतर एक बड़ा ईंधन संकट खड़ा कर दिया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि दुनिया के इस सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादक देश को अपने घरेलू बाजार को संभालने के लिए भारत से समंदर के रास्ते पेट्रोल आयात करना पड़ रहा है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, करीब 60,000 मीट्रिक टन भारतीय पेट्रोल लेकर दो टैंकर रूस के लिए रवाना हो चुके हैं, भारत से रूस को ईंधन जा रहा है। दरअसल, कीव के सटीक ड्रोन हमलों ने रूस की करीब 17 फीसदी रिफाइनिंग क्षमता को ठप कर…

ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों ने रूस के भीतर एक बड़ा ईंधन संकट खड़ा कर दिया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि दुनिया के इस सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादक देश को अपने घरेलू बाजार को संभालने के लिए भारत से समंदर के रास्ते पेट्रोल आयात करना पड़ रहा है।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, करीब 60,000 मीट्रिक टन भारतीय पेट्रोल लेकर दो टैंकर रूस के लिए रवाना हो चुके हैं, भारत से रूस को ईंधन जा रहा है। दरअसल, कीव के सटीक ड्रोन हमलों ने रूस की करीब 17 फीसदी रिफाइनिंग क्षमता को ठप कर दिया है, जिससे वहां पेट्रोल का दैनिक उत्पादन पिछले साल के 10.3 लाख बैरल से घटकर महज 8.5 लाख बैरल रह गया है। गर्मियों में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए क्रेमलिन अब हर महीने 4 लाख टन ईंधन आयात करने की कोशिशों में जुटा है।

भारत से रूस जा रहा रिफाइंड पेट्रोल

India exports fuel to Russia
India exports fuel to Russia (source : social media)

यह व्यापारिक उलटफेर बेहद चौंकाने वाला है। साल 2022 से रूस से भारी छूट पर कच्चा तेल खरीद रहा भारत अब खुद रिफाइंड पेट्रोल वापस मॉस्को भेज रहा है। शिपिंग ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि 30,000 से 40,000 टन क्षमता वाले दो भारतीय टैंकर रूसी बंदरगाहों की तरफ बढ़ रहे हैं।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पुष्टि की है कि बाजार में मची अफरातफरी और पैनिक-बाइंग को रोकने के लिए विदेशी पार्टनर्स से सही दरों पर ईंधन खरीदने की बातचीत चल रही है। हालांकि, नई दिल्ली या मॉस्को के मंत्रालयों ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन रूसी संसद ने पिछले हफ्ते अपने टैक्स कोड में गुपचुप तरीके से बदलाव कर भारतीय डिलीवरी लागत और पोर्ट कीमतों के आधार पर ईंधन आयात पर घरेलू सब्सिडी देने का रास्ता साफ कर दिया है।

रूस के 50 से अधिक प्रांतों में ईंधन की कमी

India exports fuel to Russia
India exports fuel to Russia (source : social media)

रूस के ग्यारह टाइम ज़ोन में जमीनी हकीकत काफी तनावपूर्ण हो चुकी है। लुकोइल और गाज़प्रोम नेफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों के स्थानीय फ्यूल आउटलेट्स पर बिक्री सीमित कर दी गई है। 50 से ज्यादा प्रांतों में जमाखोरी रोकने के लिए केवल गाड़ियों की टंकियों में ही सीधे तेल डाला जा रहा है, जिसकी सीमा पेट्रोल के लिए 40 लीटर और डीजल के लिए 80 लीटर तय की गई है।

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हालांकि दावा किया है कि यह किल्लत अस्थायी है और स्टॉक पिछले साल से सिर्फ 4 फीसदी कम है, लेकिन उन्होंने यह माना कि वाहन चालकों के लिए सही ग्रेड का पेट्रोल ढूंढना अब आसान नहीं रह गया है। संकट से निपटने के लिए रूस ने पेट्रोल और एविएशन फ्यूल के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

यूक्रेनी ड्रोन हमलों की कीमत चुका रहा मॉस्को

Ukraine Drone Attack
Ukraine Drone Attack (source : social media)

यह संकट मार्च के अंत से शुरू हुए यूक्रेन के उस आक्रामक अभियान का नतीजा है, जिसके तहत रूस के भीतर 50 से ज्यादा गहरे ठिकानों पर ड्रोन हमले किए गए हैं। इन ड्रोनों ने क्रीमिया से लेकर मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग की बाहरी सीमाओं पर स्थित तेल रिफाइनरियों और स्टोरेज डिपो को निशाना बनाया है।

मई में अकेले सेवास्तोपोल में कई हफ्तों के लिए नागरिक बिक्री पूरी तरह रोकनी पड़ी थी। रोजाना की 25,000 टन की कमी को पाटने के लिए रूस ने अपने पड़ोसी देश बेलारूस से भी मदद ली है, जिसने जून के शुरुआती हफ्तों में रेल के जरिए 70,000 टन से ज्यादा पेट्रोल रूस भेजा है। लेकिन गर्मियों के सफर के कारण घरेलू मांग इतनी ज्यादा है कि जमीनी रास्ते नाकाफी साबित हो रहे हैं, जिसके चलते भारतीय रिफाइनरियों से आने वाला समुद्री रास्ता अब क्रेमलिन के लिए सबसे बड़ा सहारा बन गया है।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।