सिंधु जल समझौता रद्द करने से जम्मू-कश्मीर को बाढ़ का खतरा, भारत-पाक में तनाव बढ़ने की आशंका : राजनीतिक विशेषज्ञ रशीद राहिल

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श्रीनगर, 14 अगस्त (आईएएनएस)। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को रोकने की घोषणा पर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक विशेषज्ञ रशीद राहिल ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस समझौते के रद्द होने से सबसे पहला असर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर पड़ेगा। बांध बनाकर पानी रोकने से घाटी में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, साथ ही भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव भी गहरा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में समझौते की फिर से बहाली संभव है। विशेषज्ञ रशीद राहिल ने कहा, “1947 में जब भारत और पाकिस्तान को आजादी मिली,…

श्रीनगर, 14 अगस्त (आईएएनएस)। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को रोकने की घोषणा पर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक विशेषज्ञ रशीद राहिल ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस समझौते के रद्द होने से सबसे पहला असर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर पड़ेगा। बांध बनाकर पानी रोकने से घाटी में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, साथ ही भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव भी गहरा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में समझौते की फिर से बहाली संभव है।

विशेषज्ञ रशीद राहिल ने कहा, “1947 में जब भारत और पाकिस्तान को आजादी मिली, तो बहुत सारे रिसोर्स उस पार भी थे और इस पार भी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण संसाधन पानी था, जो भारत से होते हुए पाकिस्तान से लेकर समंदर की ओर जाता है। पानी एक कुदरती देन है, लेकिन इस पर सबसे पहला हक उन लोगों का है, जिनके लिए यह आधार है। उसके बाद दूसरे लोगों को हक है।”

उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत ने कहा कि हम सिंधु जल समझौता खत्म करेंगे। हकीकत में देखें तो ये जो दरिया है, चाहे वो जम्मू-कश्मीर से गुजरते हों, या पंजाब से, उन लोगों को सबसे ज्यादा हक है। जैसा कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने भी कहा है कि इस पानी पर सबसे पहला हक यहां के लोगों का है। उसके बाद अगर ये किसी दूसरे इलाके में जाता है, तो वहां के लोग इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। मेरे ख्याल से अगर हम इसे बंद करेंगे, तो इससे कहीं ना कहीं दोनों देशों के बीच फिर से तनाव शुरू हो सकता है।

उन्होंने कहा कि सीधी सी बात है कि जब हम बांध बनाएंगे और पानी को रोक देंगे तो जिन इलाकों में बांध बनाए जाएंगे, वहां सैलाब होने का खतरा बढ़ जाता है। उसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। पानी का बहाव रोक दिया जाएगा, तो इससे जम्मू-कश्मीर को खतरा होने की संभावना है। खासतौर से घाटी को ज्यादा नुकसान होने की संभावना है। मुझे नहीं लगता है कि आने वाले समय में दोनों देशों की सरकारें इसे इस तरह से रहने देगी। इसकी किसी न किसी तरह से फिर से बहाली हो सकती है।

उन्होंने बताया, “अब सहयोग हो जाता है, आपस में लोग मिल रहे हैं, दूरियां खत्म हो रही है। जहां जम्मू-कश्मीर के हवाले से हिन्दुस्तान और पाकिस्तान मिल रहे हैं, ट्रैक टू डिप्लोमेसी पर काम करने को लेकर संकेत दे रहे हैं, तो इससे लगता है कि दोनों देशों के बीच आने वाले समय में फिर से बात हो सकती है। जो किसी के पास संसाधन होते हैं, उस पर दूसरा मुल्क निर्भर रहता है। जाहिर है कि अगर दोनों देशों के बीच तनाव हो जाता है, तो जिस मुल्क के पास संसाधन है, वो दूसरे मुल्क को इस हवाले से कमजोर कर सकता है। ये भारत के लिए एक रणनीतिक प्वाइंट है। भारत एक रणनीतिक योजना बना सकता है, जिससे पाकिस्तान को झुकना पड़ेगा।”

–आईएएनएस

केके/एबीएम

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IANS Agency

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