सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने सोमवार को कहा कि अफगानिस्तान आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक महत्वपूर्ण युद्धक्षेत्र है और उम्मीद जतायी कि तालिबान द्वारा काबुल पर कब्जा करने के बाद देश ‘‘आतंकवाद का केंद्र’’ नहीं बनेगा।
लूंग ने यहां अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के साथ संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 20 साल पहले इस क्षेत्र में अमेरिका के हस्तक्षेप ने आतंकवादी समूहों को अफगानिस्तान को सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करने से रोक दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘इसके लिए सिंगापुर आभारी है। हमें उम्मीद है कि अफगानिस्तान फिर से आतंकवाद का केंद्र नहीं बनेगा।’’
उन्होंने कहा कि सिंगापुर ने अफगानिस्तान में कर्मियों को भेजा है क्योंकि यह चरमपंथी आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक महत्वपूर्ण युद्धक्षेत्र है, जहां से चरमपंथी विचारों का इस क्षेत्र में निर्यात किया जाता है। लगभग दो दशक के बाद अमेरिका द्वारा अपने सैनिकों की पूर्ण वापसी से दो सप्ताह पहले तालिबान ने 15 अगस्त को अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा जमा लिया। अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) चले गये ।
नए तालिबान शासन से बचने और अमेरिका और कई यूरोपीय देशों सहित विभिन्न देशों में शरण लेने के लिए हजारों अफगान नागरिक और विदेशी देश से भाग रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप काबुल हवाई अड्डे पर अराजकता की स्थिति पैदा हुई और कुछ लोगों की मौत भी हुई हैं।


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