Tibetan Protest Swiss Parliament : स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में स्विस संसद के पास लगभग 200 से अधिक तिब्बती नागरिकों और मानवाधिकार समर्थकों ने एकत्र होकर चीन की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) के अनुसार, यह प्रदर्शन तिब्बत में चीन द्वारा थोपी जा रही आक्रामक सांस्कृतिक और भाषाई आत्मसातीकरण नीतियों के खिलाफ ओर्गनाइज्ड किया गया था।
कई संगठन रहे मौजूद
यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन तिब्बती कार्यकर्ता लोग्बा रंगज़ेन के आत्मदाह के 44वें दिन के अवसर पर भी आयोजित किया गया। 14 अगस्त को आयोजित इस कार्यक्रम का संयुक्त नेतृत्व ‘स्विस एंड लिचेंस्टीन तिब्बती कम्युनिटी’ और ‘स्विस तिब्बती फ्रेंडशिप एसोसिएशन’ समेत कई प्रमुख संगठनों ने किया।
लोग्बा रंगज़ेन को दी श्रद्धांजलि
बता दें, लोग्बा रंगज़ेन, मूल नाम लोबसांग पाल्डेन, 52 साल के तिब्बती स्वतंत्रता कार्यकर्ता और पूर्व भिक्षु थे। उन्होंने 2 जुलाई 2026 को न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर तिब्बत पर चीन के शासन के विरोध में आत्मदाह कर लिया था, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।
2 जुलाई 2026 की शाम को उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के सामने तिब्बती झंडा लहराया और आत्मदाह करने से पहले तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए लाइव अपील की। यह विरोध प्रदर्शन चीन द्वारा 1 जुलाई 2026 को लागू किए गए नए ‘एथनिक यूनिटी’ (जातीय एकता और प्रगति) कानून के ठीक एक दिन बाद हुआ, जिससे तिब्बती समुदाय में भारी आक्रोश था।
प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने लोग्बा रंगज़ेन की तस्वीर पर पारंपरिक खता (खादा) अर्पित की, तिब्बत का राष्ट्रगान गाया और तिब्बती शहीदों की याद में एक मिनट का मौन रखा।
कार्यक्रम में जिनेवा स्थित तिब्बत ब्यूरो की प्रतिनिधि थिनले चुक्की ने कहा कि 2009 से अब तक तिब्बत के भीतर 157 लोग आत्मदाह कर चुके हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर आंखें खोलने की अपील की।
चीन के नए ‘एथनिक यूनिटी लॉ’ का विरोध
थिनले चुक्की ने चीन के नए लागू हुए ‘एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस लॉ’ की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून तिब्बतियों की सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक पहचान को कानूनी रूप से खत्म करने की साजिश है। इसके तहत मंदारिन भाषा को प्राथमिकता दी जा रही है और तिब्बती मठों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है।
तिब्बती प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) से एक जांच दल तिब्बत भेजने और स्विट्जरलैंड सरकार से चीन पर राजनयिक दबाव बनाने का आग्रह किया।
यह भी पढ़ें – अमेरिका-ईरान ज्ञापन समझौते की 60 दिनों की डेडलाइन खत्म, बाघेई बोले- हम दबाव में नहीं बनाते नीतियां


Download Android App
Download iOS App





