Bihar Election Cancellation : बिहार चुनाव हुए 2 महीने से ऊपर बीत चुका है मगर शोर थमने का नाम नहीं ले रहा। ज्ञात हो तो बिहार चुनाव में नीतीश की अगुवाई में एनडीए को भारी बहुमत मिल था और विपक्ष ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। जिसमें भाजपा 89 सीटों के साथ बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी थी। वहीं दूसरे नंबर की पार्टी नीतीश कुमार की जेडीयू थी, जिसे 85 सीटें हासिल हुईं। उस दौरान चुनाव की निष्पक्षता पर कई सवाल खड़े हुए थे जिस में चुनाव से पहले व दौरान 10 हजार रुपए बांटने को अहम कारण बताया गया था और चुनाव आयोग की साख पर इस चलते सवाल खड़े हुए थे।
Bihar Election Cancellatio : बिहार चुनाव को मिली कोर्ट में चुनौती

अब इसी मुद्दे को लेकर प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। प्रशांत किशोर की पार्टी ने चुनाव के दौरान हुई अवैध प्रक्रियाओं को चुनौती देते हुए प्रदेश में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। पार्टी ने विशेष रूप से राज्य में महिला मतदाताओं को कथित तौर पर आचार संहिता लागू होने के दौरान 10-10 हजार रुपये के सीधे हस्तांतरण को चुनौती दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई कल करेगी।
Prashant Kishor Jan Suraaj : चुनाव अवधि के दौरान 10-10 हजार भेजे जाने को चुनौती

जन सुराज पार्टी ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिला मतदाताओं को 10-10 हजार रुपये भेजे जाने के मामले को चुनौती दी है। जन सुराज पार्टी ने तर्क दिया है कि नए लाभार्थियों को शामिल करना और चुनाव के समय पैसे जारी करना संवैधानिक और चुनावी मानदंडों का उल्लंघन था। अनुच्छेद 32 के तहत दायर रिट याचिका में कहा गया है कि ये भुगतान कई संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन थे, जिनमें अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 शामिल हैं। इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से समझौता हुआ। जन सुराज पार्टी ने अदालत से चुनाव आयोग को चुनाव परिणामों को अमान्य घोषित करने का निर्देश देने का आग्रह किया है।
Bihar Election Controversy : इस मामले को भी दी चुनौती

इसके अतिरिक्त, जन सुराज पार्टी ने मतदान केंद्रों पर जीविका स्वयं सहायता समूहों की लगभग 1.8 लाख महिलाओं की तैनाती को भी चुनौती दी है। पार्टी ने यह तर्क दिया है कि उनकी उपस्थिति गैरकानूनी थी और इसने चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को और कमजोर किया।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत भी कार्रवाई की मांग की गई है, जो चुनावों में भ्रष्ट आचरण से संबंधित है। याचिका के अनुसार, 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को मौद्रिक लाभ मिला। पार्टी का दावा है कि इससे मतदाताओं के व्यवहार पर असर पड़ सकता था।
मामला फिर बिहार की राजनीति पर आ गया है। देखना है कोर्ट कल इस पर क्या कहता है।
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