सुशासन सरकार के सहयोगी विधायक ने लॉकडाउन का किया उल्लंघन : मंजूबाला पाठक

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मंजूबाला ने कहा कि बिहार के लाखों मजदूर जो देश के अलग- अलग राज्यों में फंसे हैं। उनको भोजन में कठिनाई है। बेचारे भुख से तड़प रहे हैं परन्तु बिहार सरकार सुध नहीं ले रही हैं। और ना ही उन्हें कोई पर्याप्त मदद सरकार द्वारा दी जा रही हैं

पटना : बिहार महिला कांग्रेस की पूर्व उपाध्यक्ष मंजूबाला पाठक ने कहा कि हिसुआ के भाजपा विधायक अनिल सिंह ने लॉकडाउन का  उल्लंघन किया। ये कैसी विडंबना है कि एक तरफ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा बाहरी छात्रों को बसों से यूपी लाने का विरोध कर रहें हैं और वहीं अपने सूबे के सत्ता के सहायक दल के विधायक को अपनी बेटी को लाने का वाहन पास उन्हीं की सरकार के तंत्र द्वारा निर्गत किया जाता है। क्या लॉकडाउन में इतनी भेदभाव बिहार सरकार द्वारा उचित है?
मंजूबाला  ने कहा कि बिहार के लाखों मजदूर जो देश के अलग- अलग राज्यों में फंसे हैं। उनको भोजन में कठिनाई है। बेचारे भुख से तड़प रहे हैं परन्तु बिहार सरकार सुध नहीं ले रही हैं। और ना ही उन्हें कोई पर्याप्त मदद सरकार द्वारा दी जा रही हैं। देश का मध्यम वर्ग, मजदूर और किसान बहुत परेशान है, पर सरकार उनके कष्टों के निवारण के लिए उचित कदम नहीं उठा रहीं है। बिहार के चंपारण में गन्ना किसानों की स्थिति ठीक नहीं हैं। किसान वितिय संस्थानों से और महाजनों से कर्ज लेकर खेती करते हैं परन्तु गन्ना भुगतान अभी तक नहीं हुआ। 
लोकतंत्र मजबूत तभी होता है जब किसी भी विषय पर निर्णय सर्वसम्मति से हो और साथ ही उसका अनुपालन सभी के लिए बराबर हो। परन्तु बिहार में पक्षपात बिहार सरकार द्वारा बिल्कुल ही लोकतंत्र के लिए भयावह है। गरीब और मजदूर जो बिहार से बाहर इस लॉकडाउन में फंसे हैं वो बेचारे इस आस में बैठे है कि बिहार और केंद्र सरकार कोई सुध लेगी किंतु बिहार सरकार अपने विधायकों की सुध ले रहीं हैं परन्तु अपने मजदूरों कि कोई परवाह नहीं करती। 
मजदूर तो बाहर फंसे ही हैं और उनके परिजन भी परेशान है कि बेचारे इस लॉकडाउन में उनके अपने लोग किस हाल में होंगे। बहुत से मजदूरों के परिवार की चूल्हे नहीं जलते । बहुत से अप्रवासी मजदूर अपना झोला उठाए पैदल ही अपने गंतव्य तक चल दिए हैं। रास्ते में उनकी सुध लेने वाला कोई प्रशासनिक या सरकारी तंत्र नहीं है। कमोबेश यही हाल किसानों का भी हैं। फसलों की बुआई प्रभावित हो रही हैं। सुगमतापूर्वक खाद और बीज उपलब्ध नहीं हैं। किसानों के पास पैसा की भी कमी हैं। जो आर्थिक क्षमता थी वो पूर्व के फसल में लगा दिए परंतु गन्ना भुगतान अभी तक हुआ नहीं। 
देश में महामारी चल रहीं हैं परन्तु रसूखदार और सरकार के नुमाइंदे अपनी मर्जी और सरकार के तंत्रों के मदद से अपनी मनमानी कर रहें हैं, और  बिहार के मुखिया के सरकारी तंत्र के मदद से हो रहा है परन्तु सूबे के मुखिया के कानों पे चूं तक नहीं रेंगती। इसका ताजा उदाहरण भाजपा विधायक अनिल सिंह का लॉकडाउन का उल्लंघन है। मैं  बिहार सरकार मांग करती हूं कि  बाहर फंसे मजदूरों को वापस बुलाए और उनके सहायतार्थ अविलंब फंड की घोषणा करें साथ ही भाजपा विधायक अनिल सिंह मामले पर सूबे के मुख्यमंत्री स्पष्टीकरण जनता के बीच दें।

Desk Team