टीवी सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ में इन दिनों एक के बाद एक कई हैरान कर देने वाले मोड़ आ रहे हैं। शो की कहानी अब पूरी तरह पलट चुकी है। शांतिनिकेतन की खुशियों को किसी की काली नजर लग गई है। जहां एक तरफ तुलसी ने नंदिनी के गुनाह को छुपाने के लिए खुद को पुलिस के हवाले कर दिया, वहीं दूसरी तरफ पूरे विरानी परिवार में दरार आ चुकी है। आइए जानते हैं आज के एपिसोड में क्या कुछ खास होने वाला है।
नंदिनी का गुनाह और जेल की कोठरी में बंद तुलसी का बड़ा त्याग

सीरियल की कहानी में इस समय सबसे बड़ा सस्पेंस नंदिनी और तुलसी के बीच छुपा हुआ है। दरअसल, अपनी पत्नी वैष्णवी की जान लेने पर उतारू पार्थ को रोकने के लिए नंदिनी ने खुद अपने ही बेटे पर गोली चला दी थी। पार्थ की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे इतिहास एक बार फिर खुद को दोहराता हुआ नजर आया, जैसे कभी तुलसी ने अपने बेटे अंश को मारा था।
नंदिनी को इस बड़े पाप और जेल की सजा से बचाने के लिए तुलसी ने सारा इल्जाम अपने सिर ले लिया है और खुद पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। जेल की सलाखों के पीछे बंद तुलसी से मिलने जब नंदिनी पहुंचती है, तो उसे अपनी गलती पर बहुत पछतावा हो रहा होता है, तुलसी उसे समझाती है कि समाज एक मां को अपने बेटे का कातिल कभी नहीं मानेगा और विरानी परिवार बिखर जाएगा। तुलसी नंदिनी से वादा लेती है कि वह घर संभालेगी और यह सच कभी किसी के सामने नहीं आने देगी।
गुस्से से लाल करण ने तोड़े मां से सारे रिश्ते, तुलसी को कहा ‘शाप’

इधर शांतिनिकेतन में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। करण अपने दो बेटों- पार्थ और रियो के अंतिम संस्कार के बाद पूरी तरह टूट चुका है। गुस्से और गहरे सदमे में डूबा करण सीधे जेल में बंद तुलसी से मिलने पहुंचता है। वहां पहुंचते ही करण का गुस्सा फूट पड़ता है और वह अपनी ही मां तुलसी को ‘कातिल’ बता देता है।
करण चिल्लाते हुए तुलसी से पूछता है कि आखिर उसने उसके बेटों को क्यों मारा? तुलसी सफाई देने की कोशिश करती है कि उसने रियो को नहीं मारा, लेकिन करण उसकी एक बात सुनने को तैयार नहीं होता। वह कहता है कि भगवान किसी को भी तुलसी जैसी मां न दें। करण गुस्से में तुलसी को एक ‘शाप’ (अभिशाप) कहता है और ऐलान करता है कि आज से उसके लिए उसकी मां मर चुकी है। वह तुलसी से हमेशा के लिए रिश्ता तोड़कर वहां से चला जाता है।
सूना हुआ शांतिनिकेतन, नियति ने छोड़ा घर और मिहिर की चिट्ठी ने तोड़ा तुलसी का दिल

घर की कलह और इस खूनी खेल से तंग आकर अब विरानी परिवार के बाकी सदस्य भी दूर जाने लगे हैं। पार्थ की मौत के सदमे से परेशान होकर नियति अपना सामान पैक करके हमेशा के लिए शांतिनिकेतन छोड़कर जा रही है। गायत्री उसे रोकने की बहुत कोशिश करती है, लेकिन नियति साफ कहती है कि वह एक कातिल के घर में और ज्यादा नहीं रह सकती। इसी बीच घर के आंगन में लगा पवित्र तुलसी का पौधा भी पूरी तरह सूख जाता है, जो इस बात का इशारा है कि अब विरानी परिवार से रौनक खत्म हो चुकी है।
दूसरी तरफ, जेल में अकेली बैठी तुलसी के पास उसके पति मिहिर की एक चिट्ठी पहुंचती है। इस चिट्ठी में मिहिर ने साफ लिखा है कि वह उससे कभी मिलने नहीं आएगा। जिस परिवार को बचाने के लिए तुलसी ने अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगा दी, आज उसी परिवार और पति ने उसे अकेला छोड़ दिया है। मिहिर का यह फैसला तुलसी को अंदर से पूरी तरह तोड़ देता है।


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