90 के पार Dollar, रुपया कमजोर होने से आयात हुआ महंगा, विदेशी यात्रा, शेयर बाजार समेत इन सामानों का बदलेगा समीकरण!

Rupee VS Dollar

Rupee VS Dollar:  विदेशी पूंजी निकासी के बीच 3 दिसंबर को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुँच गया और 90 के स्तर को पार कर गया। बता दें कि यह कच्चे तेल की मज़बूत कीमतों और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता के बीच रुपया टूटा है। भारतीय रुपया 2025 में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्राओं में से एक रहा है, जिसमें लगभग 4-5% की गिरावट आई है।

Rupee VS Dollar

Rupee VS Dollar
Rupee VS Dollar (source: social media)

रुपया इस वर्ष लगभग 4 से 5 प्रतिशत तक कमजोर हुआ है। इसी कमजोरी के साथ यह 90 डॉलर के स्तर को पार कर गया है। बता दें कि अब एक डॉलर लगभग 90 भारतीय रुपया तक हो गया है और पहले की तुलना में ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। डॉलर मजबूत होने के साथ ही अब आयात भी महंगा हो जाएगा साथ ही कई सेक्टरों पर भी इसका असर पड़ेगा। विस्तार से जानते है रुपया कमजोर होने के बाद इसका आम आदमी से लेकर कई सामानों के आयात तक इसका कितना असर पड़ेगा।

Impact of Falling Rupee

रुपया कमजोर होने की वजह से इलेक्ट्रानिक्स सामान पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है क्योंकि लगभग 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक प्रोडक्शन का मुल्य आयात पर निर्भर रहता है जिससे लैपटॉप, टीवी, स्मार्टफोन की कीमत बढ़ने की संभावना है और लगभग 3 से 7 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है जिसका सीधा असर आम आदमी पर ही पड़ेगा।

Indian Rupee Depreciation 2025

Indian Rupee Depreciation 2025
Indian Rupee Depreciation 2025 (source: social media)

भारत में रुपया कमजोर होने के प्रभाव के साथ ही इसका असर विदेशों की यात्रा करने वाले और पढ़ाई करने वाले छात्रों पर भी पड़ेगा। बता दें कि अब विदेशी यात्रा और विदेश में पढ़ाई करने के लिए अधिक खर्च करना पड़ेगा क्योंकि डॉलर 90 के पार हो गया है। अब 10,000 अमेरिकी डॉलर को भारतीय रुपये में 90 के रेट से बदलने के लिए 9 लाख रुपये खर्च करने होंगे और वहीं डॉलर 80 के रेट पर होता तो सिर्फ 8 लाख रुपये खर्च करने होते।

Falling Rupee Benefits

Falling Rupee Benefits
Falling Rupee Benefits (source: social media)

विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे क्षेत्रों पर जोर दिया है जिन्हें रुपये में गिरावट से लाभ हो सकता है। निर्यात पर निर्भर सेक्टर जैसे झींगा, कपड़ा, IT, फार्मा, इंजीनियरिंग, धातु और ऑटो को गिरते रुपये से फायदा हो सकता है। वहीं आयात पर निर्भर क्षेत्रों जैसे एफएमसीजी, प्लास्टिक पॉलिमर, तेल और गैस पर लागत का दबाव रहने की आशंका है।

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