Union Budget 2026 Expectations: केंद्रीय बजट 2026(Union Budget 2026) को 1 फरवरी को पेश किया जाएगा। बजट से पहले 31 जनवरी को आने वाला आर्थिक सर्वेक्षण सरकार की प्राथमिकताओं की झलक देगा। इस बार उद्योग जगत, निवेशकों और आम जनता को कर सुधार, सेक्टरवार बजट आवंटन और निर्यात बढ़ाने को लेकर कई उम्मीदें हैं।
Union Budget 2026 Expectations: आइए जानते हैं बजट 2026 से जुड़ी प्रमुख अपेक्षाएं:
1. उद्योगों के लिए आसान नियम और जीएसटी सुधार
व्यापार संगठनों की मांग है कि कारोबार को आसान बनाने के लिए नीतियों में सुधार किया जाए। साथ ही जीएसटी प्रणाली को सरल और तार्किक बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
2. Income Tax System में बदलाव की उम्मीद कम
विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव की संभावना कम है क्योंकि नया आयकर कानून (Budget 2026 Income tax) 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला है। हालांकि सरकार से यह उम्मीद की जा रही है कि नया कानून सरल होगा और गैर-जरूरी नियमों को हटाया जाएगा।
3. Middle Class को और राहत की संभावना
पिछले बजट में 12 लाख रुपये तक की आय को नई कर व्यवस्था में लगभग कर-मुक्त किया गया था। वहीं अब कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई को देखते हुए, स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाकर ₹1 लाख किया जा सकता है। 30% टैक्स स्लैब की सीमा बढ़ाने पर भी विचार हो सकता है।
4. निर्यात और विदेशी निवेश को बढ़ावा
रुपये की कमजोरी और अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के चलते सरकार से ऐसे कदमों की उम्मीद है जो निर्यात को मजबूत करें और आयात पर निर्भरता कम करें। इसके साथ ही विदेशी निवेश (FPI) को आकर्षित करें

5. पूंजीगत लाभ कर में सरलता की मांग
निवेशक चाहते हैं कि कैपिटल गेन टैक्स को आसान बनाया जाए। वहीं अलग-अलग संपत्तियों पर टैक्स दरों में समानता लाई जाए। इसके साथ ही होल्डिंग अवधि को सरल श्रेणियों में बांटा जाए।
6. पुराने टैक्स विवादों के समाधान पर जोर
विशेषज्ञ एक बार फिर “विवाद से विश्वास” जैसी योजना लागू करने की मांग कर रहे हैं। इससे करीब 38,000 मामलों में फंसे 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के विवाद सुलझाए जा सकते हैं। जिससे व्यवसायों को ब्याज और जुर्माने से राहत मिलेगी।
7. 80C और 80D में राहत की उम्मीद
काफी समय से धारा 80C की सीमा ₹1.5 लाख पर ही बनी हुई है। वहीं स्वास्थ्य बीमा (80D) में कटौती बढ़ाने की मांग भी उठ रही है खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए अधिक राहत की उम्मीद की जा रही है।
8. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर छूट बढ़ाने की मांग
विशेषज्ञ चाहते हैं कि इक्विटी पर टैक्स फ्री लिमिट ₹1.25 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख की जाए और रियल एस्टेट और अन्य निवेशों पर इंडेक्सेशन लाभ पर फिर से विचार हो।
9. MSME और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को समर्थन
संभावना है कि सरकार कच्चे माल पर सीमा शुल्क घटाए और तैयार सामान पर चुनिंदा शुल्क बढ़ाए ताकि “मेक इन इंडिया” को मजबूती मिले। इसके साथ ही ईवी, सोलर एनर्जी, सेमीकंडक्टर और रक्षा क्षेत्र को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
10. कॉर्पोरेट टैक्स में स्थिरता और नए प्रोत्साहन
विश्लेषकों के अनुसार कॉर्पोरेट टैक्स में बड़े बदलाव नहीं होंगे। लेकिन स्टार्टअप, हरित ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और विनिर्माण के लिए नए इंसेंटिव दिए जा सकते हैं

Income Tax Budget 2026: अलग-अलग क्षेत्रों की उम्मीदें और अनुमान
केंद्रीय बजट 2026 को लेकर कई आर्थिक संस्थानों और उद्योगों ने अपनी उम्मीदें जताई हैं। रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार सरकार वित्त वर्ष 2027 में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के लगभग 4.3% तक सीमित रखने का प्रयास कर सकती है, जो पिछले साल के अनुमान से थोड़ा कम होगा। इसके साथ ही कर राहत, रेलवे बजट में मामूली बढ़ोतरी और अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित क्षेत्रों के लिए सहायता की उम्मीद भी जताई जा रही है। आइए जानते हैं अलग-अलग सेक्टर बजट से क्या अपेक्षा कर रहे हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर
इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे: सेमीकंडक्टर सप्लाई में रुकावट, रुपये की कमजोरी और कच्चे माल की बढ़ती कीमतें। इस क्षेत्र को उम्मीद है कि सरकार जीएसटी से जुड़ी दिक्कतों को आसान बनाएगी और जरूरी कंपोनेंट्स पर अस्थायी टैक्स छूट देगी, जिससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिल सके। इसके अलावा, निर्यात बढ़ाने के लिए लॉजिस्टिक्स सपोर्ट और शुल्क में राहत जैसे कदमों की भी मांग की जा रही है।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र
ग्रीन एनर्जी सेक्टर सरकार से बड़े फैसलों की उम्मीद कर रहा है। उद्योग चाहता है कि बजट में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ज्यादा फंड दिया जाए और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिले। साथ ही आधुनिक तकनीक, ऑटोमेशन और टिकाऊ समाधानों के लिए स्पष्ट और आसान नीतियां लाने की भी अपेक्षा है।
NBFC (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां)
एनबीएफसी सेक्टर देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। यह क्षेत्र सरकार से बड़े बदलावों से ज्यादा बेहतर व्यवस्था और तेजी से काम होने की उम्मीद कर रहा है। इनकी मांग है कि मंजूरी की प्रक्रिया सरल हो, री-फाइनेंसिंग तक पहुंच आसान बने और MSME सेक्टर को खास सहयोग मिले, जिससे छोटे कारोबारियों को ज्यादा लोन मिल सके।
प्रतिभूति लेनदेन कर (STT)
शेयर बाजार से जुड़े निवेशक एसटीटी को लेकर राहत की उम्मीद कर रहे हैं। कई बाजार विशेषज्ञ चाहते हैं कि डिलीवरी ट्रेड पर STT को कम किया जाए या पूरी तरह हटाया जाए। इसके अलावा, कैपिटल गेन टैक्स की दरों को भी कम करने की मांग हो रही है, खासतौर पर छोटे निवेशकों के लिए।
निर्यात सेक्टर
निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार से मजबूत कदम उठाने की उम्मीद है। संभावना है कि सरकार निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं को आगे बढ़ाएगी और छोटे निर्यातकों को लोन पर सरकारी गारंटी देगी।इसके साथ ही टेक्सटाइल, चमड़ा और खिलौना उद्योग जैसे श्रम-आधारित क्षेत्रों को विशेष मदद मिल सकती है।
सोना और गोल्ड निवेश
सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं और निवेशक इसे सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। हालांकि, गोल्ड फंड और गोल्ड ETF पर टैक्स नियमों को लेकर नाराजगी है। निवेशक चाहते हैं कि सभी गोल्ड निवेशों के लिए लंबी अवधि की अवधि को एक साल किया जाए, ताकि टैक्स में राहत मिल सके। साथ ही सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को दोबारा शुरू करने की भी मांग तेज हो रही है।
तकनीक और MSME सेक्टर
बजट 2026-27 में सरकार छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को डिजिटल रूप से मजबूत बनाने पर जोर दे सकती है। इसके तहत क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सॉफ्टवेयर सेवाएं और साइबर सुरक्षा अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। साथ ही MSME के लिए आसान और मजबूत लोन योजनाओं की भी मांग की जा रही है।
इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
उद्योग जगत चाहता है कि बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए खास सब्सिडी दी जाए, खासकर इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर। साथ ही सभी ईवी पार्ट्स पर जीएसटी को 5% तक सीमित करने की मांग है ताकि वाहन सस्ते हो सकें। कच्चे माल से लेकर चार्जिंग स्टेशन तक पूरी व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान देने की उम्मीद है।
सौर ऊर्जा
सोलर सेक्टर को उम्मीद है कि पीएलआई योजना को और बड़ा किया जाएगा ताकि पूरे सोलर उद्योग को फायदा मिले। सूर्य घर योजना और पीएम-कुसुम जैसी योजनाओं को और बेहतर बनाने की भी मांग है। इसके अलावा ग्रीन फाइनेंस और हरित बॉन्ड जैसे नए फंडिंग विकल्प शुरू किए जा सकते हैं।
स्टार्टअप सेक्टर
स्टार्टअप्स चाहते हैं कि पूंजी और लोन आसानी से उपलब्ध हों। जीएसटी नियम सरल हों, निवेशकों के लिए टैक्स व्यवस्था साफ हो और ESOP से जुड़े नियम आसान बनाए जाएं। साथ ही कम कागजी कार्रवाई वाला सिस्टम लागू करने की भी उम्मीद है।
रक्षा क्षेत्र
पिछले बजट में रक्षा क्षेत्र को बड़ा बजट मिला था। अब उद्योग चाहता है कि मंजूर परियोजनाओं को जल्दी काम में बदला जाए। देश में ही मरम्मत और रखरखाव सुविधाओं को बढ़ावा मिले और टेस्टिंग व सर्टिफिकेशन पर ज्यादा निवेश हो।
लॉजिस्टिक्स और परिवहन
सरकार से बंदरगाहों, फ्रेट कॉरिडोर और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों के तेजी से विकास की उम्मीद है। वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स पर जीएसटी को सरल बनाने और डिजिटल सिस्टम को बेहतर करने की मांग भी की जा रही है।
स्वास्थ्य सेवाएं
बजट में मां और बच्चे की देखभाल, टीकाकरण और नवजात सेवाओं पर ज्यादा खर्च की उम्मीद है। महिलाओं से जुड़ी बीमारियों जैसे सर्वाइकल और ओवरी कैंसर पर भी खास ध्यान देने की मांग है। इसके अलावा गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल सुविधाएं बढ़ाने और शुरुआती जांच को बढ़ावा देने की जरूरत बताई जा रही है।
इस्पात उद्योग
स्टील सेक्टर चाहता है कि आयात से सुरक्षा मिले और जरूरी कच्चे माल पर टैक्स को संतुलित किया जाए। नई तकनीक अपनाने और फैक्ट्रियों के विस्तार के लिए सस्ता और लंबी अवधि का लोन भी उपलब्ध कराया जाए।
शिक्षा क्षेत्र
डिजिटल क्लासरूम, शिक्षकों की ट्रेनिंग और पढ़ाई से जुड़े सामान पर टैक्स कम करने की मांग है। किताबों के कागज पर लगने वाला जीएसटी हटाने और ऑनलाइन शिक्षा उपकरणों पर टैक्स कम करने की भी उम्मीद है। स्किल डेवलपमेंट के लिए CSR फंड का उपयोग बढ़ाने का सुझाव भी दिया जा रहा है।
FMCG सेक्टर
एफएमसीजी कंपनियां चाहती हैं कि पैक किए गए आटे पर भी 0% जीएसटी लगाया जाए, जैसे गेहूं पर है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को ज्यादा सब्सिडी और किसानों के साथ साझेदारी को बढ़ावा देने की मांग है।
रेस्तरां उद्योग
रेस्तरां सेक्टर को खाने-पीने की चीजों पर टैक्स कम करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट फिर से लागू करने की उम्मीद है। इसके अलावा इस सेक्टर को अलग पहचान देने और बेहतर नीति के लिए एक अलग विभाग बनाने की मांग भी है।
बीमा क्षेत्र
बीमा कंपनियां चाहती हैं कि ग्रामीण इलाकों, छोटे कारोबारियों और नए ग्राहकों के लिए बीमा सस्ता और आसान बने। माइक्रो इंश्योरेंस और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को बढ़ावा देने की भी उम्मीद है।
आवास और इंफ्रास्ट्रक्चर
सरकार से किफायती घरों को बढ़ावा देने, पर्यावरण के अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहन देने और निवेश बढ़ाने के उपायों की उम्मीद है।
कृषि क्षेत्र
किसानों के समूह (FPO) के जरिए खेती को मजबूत बनाने पर जोर दिया जा सकता है। बेहतर लोन सुविधा, फसल के बाद भंडारण और प्रोसेसिंग सुविधाएं बढ़ाने की उम्मीद है ताकि किसानों को सही दाम मिल सके।
हरित ऊर्जा परियोजनाएं
नवीकरणीय ऊर्जा के लिए पहले से ज्यादा बजट दिया गया है, लेकिन उद्योग सस्ती और लंबी अवधि की फंडिंग चाहता है। साथ ही स्थिर और भरोसेमंद नीतियों की मांग भी की जा रही है।
स्मार्ट मीटर योजना
2026 के बजट में स्मार्ट मीटरों के लिए ज्यादा फंड और आधुनिक मीटरिंग सिस्टम को आधिकारिक इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा मिलने की उम्मीद है। इससे निवेश और सस्ता कर्ज मिलना आसान होगा।
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