Arvind Kejriwal Affidavit: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ बुधवार को एक और एफिडेविट दाखिल किया। इसमें उन्होंने जज के बच्चों का मुद्दा उठाया। केजरीवाल ने कहा कि जस्टिस शर्मा के दोनों बच्चे वकील तुषार मेहता के अधीन काम करते हैं और उन्हें केस दिए जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली शराब घोटाले मामले में तुषार मेहता सीबीआई की तरफ से वकील हैं। ऐसे में सवाल उठाया गया कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा तुषार मेहता के खिलाफ फैसला कैसे देंगी।
जज के परिवार के सरकारी पद और लाभ पर सवाल
केजरीवाल ने अपने हलफनामे में कहा कि सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक जज स्वर्णकांता शर्मा के बेटे ईशान शर्मा सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के पैनल वकील (ग्रुप ‘A’) हैं और उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में भी केंद्र सरकार के लिए काम किया है।
जज की बेटी शंभवी शर्मा भी दिल्ली हाईकोर्ट में सरकारी वकील हैं और सुप्रीम कोर्ट में ग्रुप ‘C’ पैनल काउंसल के तौर पर सूचीबद्ध हैं। केजरीवाल ने कहा कि ये सिर्फ औपचारिक पद नहीं हैं, बल्कि इनसे सरकारी काम, कोर्ट में पेशी और आर्थिक लाभ भी जुड़े होते हैं।
केजरीवाल ने CBI और केस आवंटन पर सवाल उठाया
हलफनामे में 13 सितंबर 2022 की केंद्र सरकार की अधिसूचना का हवाला दिया गया है। इसमें बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के मामलों का बंटवारा अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल के जरिए पैनल वकीलों को किया जाता है। इसके अलावा, कानून मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद FAQ में भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में केसों का आवंटन सॉलिसिटर जनरल के माध्यम से होता है। केजरीवाल ने इसमें CBI की भूमिका और संभावित टकराव का भी आरोप लगाया है।
सरकारी तंत्र के हितों के टकराव का आरोप
केजरीवाल ने अपने हलफनामे में कहा कि इस मामले में जांच एजेंसी CBI की ओर से सॉलिसिटर जनरल अदालत में पेश हो रहे हैं और उनके रीक्यूजल आवेदन का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वही सरकारी तंत्र, जो जज के परिवार को केस आवंटित करता है, उसके अधिकारी अब उनके खिलाफ केस में पेश हैं, जिससे स्पष्ट तौर पर हितों का टकराव बनता है।
हलफनामे में RTI के आंकड़े
हलफनामे में RTI के हवाले से बताया गया कि जज के बेटे को 2023 में 2487 केस, 2024 में 1784 केस और 2025 में 1633 केस आवंटित किए गए।
यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील है- केजरीवाल

केजरीवाल ने कहा कि यह कोई सामान्य मामला नहीं है, बल्कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील आपराधिक केस है। वह केंद्र सरकार के विरोधी नेता हैं और उन्हीं एजेंसियों द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने अवलोकन का हवाला दिया कि लोकतंत्र में धारणा भी मायने रखती है और जांच एजेंसियों को निष्पक्ष दिखना जरूरी है।
निष्पक्षता पर सवाल

केजरीवाल ने कहा कि वह जज पर व्यक्तिगत पक्षपात का आरोप नहीं लगा रहे हैं। उनका कहना है कि परिस्थितियां ऐसी हैं कि एक सामान्य व्यक्ति के मन में निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा हो सकता है।
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